PM Modi Message: 10 जून 2026 का दिन भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के मुखिया के तौर पर 4,399 दिन पूरे करते हुए एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके साथ ही उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के ‘लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री’ रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि न केवल उनके राजनीतिक सफर का एक मील का पत्थर है, बल्कि यह देश की जनता द्वारा उन पर जताए गए अटूट भरोसे का भी प्रतीक है।
आधुनिकता के साथ संस्कृति का संगम: PM मोदी के कार्यकाल में भारत की बदलती पहचान
पीएम मोदी का संदेश
ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता महज एक पद नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है। उन्होंने अपने संदेश में ‘जनसेवा’ को सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी बताया। उन्होंने कहा कि विनम्रता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ निरंतर कार्य करने वाला ही जनता के दिलों में स्थान बना सकता है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर संस्कृत का एक प्रेरणादायक श्लोक—”सदानुरक्तप्रकृतिः प्रजापालनतत्परः। विनीतात्मा हि नृपतिर्भूयसी श्रियमश्नुते॥”—साझा किया, जिसका अर्थ है कि जो शासक अपनी प्रजा के प्रति समर्पित और विनम्र होता है, वह अटूट समृद्धि प्राप्त करता है।
एक सफर, तीन जनादेश
इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड के पीछे प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 12 वर्षों के लगातार तीन सफल कार्यकालों की मेहनत है:
प्रथम कार्यकाल: 26 मई 2014 को उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, जिसमें उन्हें देश का भारी समर्थन मिला था।
द्वितीय कार्यकाल: 2019 के आम चुनावों में जनता ने उन पर और अधिक भरोसा जताया और 30 मई 2019 को उन्होंने पुनः कार्यभार संभाला।
तृतीय कार्यकाल: 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत के बाद, 9 जून 2024 को उन्होंने लगातार तीसरी बार देश की बागडोर संभाली।
इसके विपरीत, जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड उनके 1952 से 1964 के बीच के लगातार निर्वाचित कार्यकाल पर आधारित था, जिसे आज मोदी ने 4,399 दिनों के सफर के साथ पार कर लिया है।
लोकतंत्र की मजबूती का संकेत
प्रधानमंत्री मोदी का यह कार्यकाल भारत में लोकतंत्र की जड़ें और गहरी होने का परिचायक है। उन्होंने न केवल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा है, बल्कि यह भी सिद्ध किया है कि भारत में निरंतरता और सुशासन की राजनीति को जनता का समर्थन प्राप्त है। उनके 12 वर्षों के शासनकाल में देश ने डिजिटल क्रांति, बुनियादी ढांचे के निर्माण और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को नए सिरे से स्थापित किया है।
यह उपलब्धि भारतीय राजनीति के उस बदलते स्वरूप को दर्शाती है, जहाँ अब ‘विकास’ ही चुनावी जीत और राजनीतिक सफलता का मुख्य आधार है। प्रधानमंत्री का यह ऐतिहासिक दिन देश के करोड़ों नागरिकों के लिए एक नई ऊर्जा और संकल्प का संचार करने वाला है।
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