चंडीगढ़ दौरे पर PM मोदी, 17 जुलाई को दो अहम सड़क परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण

चंडीगढ़. ट्राइसिटी में रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद अब और मजबूत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को अपने चंडीगढ़ दौरे के दौरान 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की दो अहम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की सौगात देंगे। इनमें 1,983 करोड़ रुपये की लागत वाले जीरकपुर-पंचकूला बाइपास का शिलान्यास और 1,525.30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार आईटी सिटी-कुराली एक्सप्रेसवे का उद्घाटन शामिल है। इन परियोजनाओं के शुरू होने से ट्राइसिटी में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, यात्रा का समय घटेगा और उद्योग-व्यापार को भी नई रफ्तार मिलेगी। 19.2 किलोमीटर लंबा छह लेन का जीरकपुर-पंचकूला बाइपास

Wrriten By :

Editor

Published On :

जुलाई 14, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

चंडीगढ़.

ट्राइसिटी में रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद अब और मजबूत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को अपने चंडीगढ़ दौरे के दौरान 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की दो अहम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की सौगात देंगे।

इनमें 1,983 करोड़ रुपये की लागत वाले जीरकपुर-पंचकूला बाइपास का शिलान्यास और 1,525.30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार आईटी सिटी-कुराली एक्सप्रेसवे का उद्घाटन शामिल है। इन परियोजनाओं के शुरू होने से ट्राइसिटी में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, यात्रा का समय घटेगा और उद्योग-व्यापार को भी नई रफ्तार मिलेगी। 19.2 किलोमीटर लंबा छह लेन का जीरकपुर-पंचकूला बाइपास एनएच-7 पर जीरकपुर-पटियाला जंक्शन से शुरू होकर एनएच-5 पर जीरकपुर-परवाणू जंक्शन तक जाएगा। इसमें 6.195 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन, फ्लाईओवर, अंडरपास और रेलवे ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। इसके बनने से दिल्ली, अंबाला, बद्दी, पंचकूला और शिमला की ओर जाने वाले हजारों वाहनों को जीरकपुर शहर के भीतर से नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे रोजाना लगने वाले लंबे जाम में बड़ी कमी आएगी।

छह लेन का आईटी सिटी-कुराली एक्सप्रेसवे ट्राइसिटी की कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। इस एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर बिना किसी ट्रैफिक सिग्नल के 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से सफर संभव है। इससे मोहाली, न्यू चंडीगढ़ और कुराली के बीच यात्रा का समय काफी घटेगा और आईटी, उद्योग तथा रियल एस्टेट क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। दोनों परियोजनाएं प्रस्तावित 244 किलोमीटर लंबे ट्राइसिटी रिंग रोड नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके पूरा होने से शहर के भीतर गैर-स्थानीय वाहनों का दबाव कम होगा, ईंधन की बचत होगी, प्रदूषण घटेगा और माल परिवहन अधिक तेज व सुरक्षित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा दिल्ली-एनसीआर के बीच आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

2