
PM Modi Brussels Visit : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर 2026 में बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने इसकी जानकारी दी है। इस समझौते को भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक साझेदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हस्ताक्षर के बाद समझौता लागू होने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
एंटोनियो कोस्टा ने पीएम मोदी के दौरे की पुष्टि की
कनाडा के मॉन्ट्रियल में आयोजित मॉन्ट्रियल काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक कार्यक्रम में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने प्रधानमंत्री मोदी के संभावित दौरे को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए आएंगे। बताया जा रहा है कि मोदी का ब्रुसेल्स दौरा 17 दिसंबर को होने वाली यूरोपीय नेताओं की बैठक से ठीक पहले हो सकता है। भारत और यूरोपीय संघ ने इसी साल की शुरुआत में मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत पूरी कर ली थी। अब औपचारिक हस्ताक्षर की तैयारी है।
दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल होगा भारत-EU व्यापार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसके जरिए दो अरब से अधिक लोगों का एक बड़ा बाजार एक साथ आने का अनुमान है। यह बाजार वैश्विक अर्थव्यवस्था का करीब एक चौथाई हिस्सा होगा। समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना, आयात-निर्यात को आसान बनाना और कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों में बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इससे भारतीय कारोबारियों को यूरोपीय देशों में अपना व्यापार बढ़ाने का मौका मिल सकता है।
भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को मिलेगा फायदा
इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलने की उम्मीद है। समझौते के तहत भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को यूरोपीय बाजार में शुल्क मुक्त यानी ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलने का अनुमान है। इससे भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, आभूषण, रत्न और दूसरे निर्यात आधारित उद्योगों को बड़ा फायदा हो सकता है। अभी इन उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क के कारण भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। शुल्क में राहत मिलने से भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी हो सकती है और निर्यात बढ़ सकता है।

यूरोपीय संघ को भी भारत में मिलेगा बड़ा व्यापारिक अवसर
इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ को भी भारत के बाजार में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा। EU से भारत आने वाले सामान के बड़े हिस्से पर आयात शुल्क में कटौती या छूट दिए जाने की व्यवस्था होगी। हालांकि ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में शुल्क में राहत धीरे-धीरे लागू की जाएगी। भारत ने घरेलू कृषि और डेयरी उद्योग को इस समझौते से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य देश के किसानों, पशुपालकों और घरेलू उत्पादकों के हितों की सुरक्षा करना है।
सर्विस सेक्टर और आईटी कारोबार को भी मिलेगा बढ़ावा
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी (IT), प्रोफेशनल सर्विसेज, बिजनेस कंसल्टिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसे सेवा क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। इससे भारतीय आईटी कंपनियों, पेशेवरों और सेवा प्रदाताओं के लिए यूरोपीय बाजार में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। दोनों पक्षों के बीच तकनीकी सहयोग, निवेश और कारोबारी साझेदारी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
136 अरब डॉलर से अधिक पहुंचा भारत-EU का व्यापार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार लगातार बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार 136.54 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारतीय मुद्रा में यह आंकड़ा 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। ऐसे में मुक्त व्यापार समझौते से दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच कारोबारी गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है। दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी का ब्रुसेल्स दौरा इस साझेदारी को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।











