PM Awas Yojana: 4-5 महीने से अटकी अगली किस्त, रायपुर समेत कई शहरों में अधूरे पड़े मकान

पक्के घर का सपना देख रहे छत्तीसगढ़ के हजारों परिवारों की मुश्किल बढ़ गई है। पीएम आवास योजना की अगली किस्त 4-5 महीने से अटकी है। रायपुर समेत कई शहरों में कहीं छत, कहीं प्लास्टर तो कहीं फर्श का काम अधूरा है। बारिश के बीच परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है।

PM Awas Yojana

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 25, 2026

PM Awas Yojana: छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) के तहत पक्के घर का सपना देख रहे हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रायपुर नगर निगम सहित कई नगरीय निकायों में हितग्राहियों की अगली किस्त पिछले चार से पांच महीनों से अटकी होने की शिकायत सामने आई है। राशि का भुगतान नहीं होने के कारण कई परिवारों के मकान अधूरे पड़े हैं। बारिश के मौसम में इन अधूरे मकानों में रहना परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

पहली किस्त के बाद निर्माण कार्य पड़ा धीमा

हितग्राहियों के मुताबिक, योजना के तहत मकान निर्माण की प्रगति के आधार पर अलग-अलग चरणों में सहायता राशि जारी की जाती है। पहली किस्त मिलने के बाद कई परिवारों ने अपनी बचत लगाकर निर्माण शुरू कराया। लोगों को उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अगली किस्त भी समय पर मिल जाएगी, लेकिन भुगतान में देरी से निर्माण कार्य प्रभावित हो गया। कई जगह दीवारें खड़ी हैं, मगर छत नहीं बन सकी है।

कहीं छत तो कहीं प्लास्टर और फर्श का काम बाकी

किस्त का भुगतान नहीं होने से अलग-अलग निर्माण चरणों में मकान अटके हुए हैं। कुछ घरों में छत का काम अधूरा है, जबकि कई मकानों में प्लास्टर, दरवाजे-खिड़कियां और फर्श का काम बाकी है। बारिश के कारण अधूरे निर्माण में पानी भरने और सामान खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में परिवारों को आर्थिक नुकसान के साथ रहने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

PMAY-U 2.0 में 2.50 लाख तक सहायता का प्रावधान

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पात्र हितग्राहियों को केंद्र की ओर से प्रति आवास अधिकतम 2.50 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है। लाभार्थी आधारित निर्माण यानी BLC श्रेणी में यह राशि मकान निर्माण की प्रगति से जुड़े अलग-अलग चरणों में दी जाती है। किसी एक चरण का भुगतान रुकने पर आगे का निर्माण भी प्रभावित हो जाता है।

महंगाई ने बढ़ाई हितग्राहियों की आर्थिक परेशानी

हितग्राहियों का कहना है कि निर्माण सामग्री, मजदूरी और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में लंबित किस्त की भरपाई अपनी जेब से करना अधिकांश परिवारों के लिए संभव नहीं है। जिन लोगों ने पहली किस्त के बाद अपनी जमा पूंजी लगाकर निर्माण शुरू कराया था, उनके सामने अब अतिरिक्त धन जुटाने की समस्या खड़ी हो गई है। भुगतान में देरी से मकान पूरा करने की निर्धारित समयसीमा भी प्रभावित होने की आशंका है।

गृह प्रवेश के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी लंबित

कई हितग्राहियों ने मकान पूरा होने और गृह प्रवेश के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में भी देरी की शिकायत की है। उनका कहना है कि योजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उन्हें प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हुआ है। राशि लंबित होने से लाभार्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और वे जल्द भुगतान की मांग कर रहे हैं।

केंद्र से करोड़ों की सहायता मंजूर होने का दावा

केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, 9 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ के 160 BLC प्रोजेक्टों में 11,477 मकानों के लिए 68.86 करोड़ रुपये की पहली किस्त की केंद्रीय सहायता मंजूर की गई थी। इसके अलावा जून 2026 में राज्य के 6,882 और 7,434 मकानों से संबंधित दूसरी किस्त की केंद्रीय सहायता जारी करने के आदेश भी दर्ज हैं।

नगरीय निकायों में भुगतान में देरी पर उठे सवाल

केंद्र से सहायता मंजूर होने के बावजूद यदि हितग्राहियों को समय पर राशि नहीं मिल रही है, तो भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है कि उनकी किस्त किस स्तर पर लंबित है। अब उनकी मांग है कि नगरीय निकाय लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट करें और पात्र हितग्राहियों के खातों में जल्द राशि पहुंचाई जाए।

बारिश के बीच जल्द किस्त जारी होने की उम्मीद

अधूरे मकानों में रह रहे परिवारों की सबसे बड़ी चिंता बारिश के दौरान सुरक्षित आवास की है। हितग्राहियों को उम्मीद है कि लंबित किस्त जल्द जारी होगी, ताकि रुका हुआ निर्माण फिर शुरू कराया जा सके। यदि भुगतान में और देरी होती है, तो अधूरे मकानों में रहने वाले परिवारों की परेशानी बढ़ सकती है। फिलहाल सभी की नजर नगरीय निकायों और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर है।

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