छड़ी के सहारे खेलकर प्राची ने जापान में लहराया तिरंगा, पैरा टेबल टेनिस में जीता ब्रॉन्ज मेडल

कानपुर  एशियाई पैरा गेम्स 2026 में उन्नाव की प्राची पांडेय ने महिला एकल क्लास सिक्स स्पर्धा टेबल टेनिस में कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया। विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज प्राची ने सेमीफाइनल मुकाबले में इराक की नजला अल को शिकस्त देकर पोडियम पर अपनी जगह बनाई। प्राची की ये जीत मौजूदा समय में पैरालंपिक तथा एशियन पैरा गेम्स की चैंपियन के खिलाफ रही। स्पाइन में दिक्कत के चलते छड़ी के सहारे खड़ी होकर खेलने वाली प्राची इसके पहले 12 बार रैंकिंग टूर्नामेंट में पदक जीत चुकीं हैं। अब छड़ी के सहारे प्राची ने जापान में तिरंगा

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Published On :

अक्टूबर 20, 2026

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कानपुर
 एशियाई पैरा गेम्स 2026 में उन्नाव की प्राची पांडेय ने महिला एकल क्लास सिक्स स्पर्धा टेबल टेनिस में कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया। विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज प्राची ने सेमीफाइनल मुकाबले में इराक की नजला अल को शिकस्त देकर पोडियम पर अपनी जगह बनाई।

प्राची की ये जीत मौजूदा समय में पैरालंपिक तथा एशियन पैरा गेम्स की चैंपियन के खिलाफ रही। स्पाइन में दिक्कत के चलते छड़ी के सहारे खड़ी होकर खेलने वाली प्राची इसके पहले 12 बार रैंकिंग टूर्नामेंट में पदक जीत चुकीं हैं। अब छड़ी के सहारे प्राची ने जापान में तिरंगा लहराया।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं प्राची
मूल रूप से उन्नाव की रहने वाली प्राची पिछले एक साल से गांधीनगर स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सेंटर में टेबल टेनिस का कड़ा अभ्यास कर पदक जीतने में सफल रहीं। चंडीगढ़ की सॉफ्टवेयर इंजीनियर में स्पाइन की गंभीर बीमारी के बाद भी हार नहीं मानी और 6 बार स्पाइन की सर्जरी के बाद खुद को फिर से खड़ा किया और देश के लिए पदक जीता।

बचपन से ही खेल में रुचि रखने वाली प्राची ने शारीरिक दिव्यांगता को मात देकर पोडियम तक का सफर तय किया। प्राची इससे पहले ब्राजील, थाईलैंड, जर्मनी नाइजीरिया और जॉर्डन में हुई अंतरराष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं।

हर दिन कड़ा अभ्यास
प्रतिदिन 1000 से ज्यादा बार फोरहैंड, टॉप स्पिन जैसे शॉट का अभ्यास करने वाली प्राची की उपलब्धि पर उन्नाव और कानपुर के टेबल टेनिस खिलाड़ियों में खुशी का माहौल है। प्राची के कोच अमरेश ने बताया कि प्राची का जज्बा उसको पदक तक पहुंचने में मददगार बना। सामने कितना भी मजबूत प्रतिद्वंद्वी क्यों ना हो प्राची ने कभी हार नहीं मानी।

सेमीफाइनल मुकाबले में भी इराक की प्रतिद्वंद्वी को छड़ी के सहारे खड़ी होकर प्राची ने पस्त किया। दैनिक जागरण संवाददाता अंकुश से हुई बातचीत में प्राची ने बताया कि पूरी तैयारी के साथ चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करने गई थी। उम्मीद थी कि पदक जरूर लाऊंगी। निरंतर अभ्यास से सफलता मिली। शुरुआती समय में स्पॉन्सरशिप को लेकर लग रहा था कि चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं बना पाऊंगी लेकिन परिवार के साथ और खेल प्रेमियों की मदद के चलते चैंपियनशिप तक गई और पदक जीतने में सफल रही।