Delhi Protest: संसद की गृह मामलों की कमेटी की बैठक मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को उस समय हंगामे में बदल गई, जब विपक्षी सदस्यों ने पैलेट गन के कथित इस्तेमाल और जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस के लाठीचार्ज के मुद्दे पर चर्चा की मांग उठाई। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी सांसद इन मामलों को कमेटी की बैठक में उठाना चाहते थे, लेकिन चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर सदस्यों के बीच तीखी बहस की स्थिति बन गई।
पैलेट गन मामले पर चर्चा की मांग
सूत्रों के अनुसार, गृह मामलों की कमेटी के चेयरमैन और बीजेपी सांसद राधामोहन दास ने विपक्ष की ओर से उठाई गई इन मांगों पर चर्चा करने से इनकार कर दिया। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि छात्रों से जुड़े प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर संसदीय समिति के स्तर पर चर्चा जरूरी है। चर्चा की अनुमति नहीं मिलने के बाद बैठक में माहौल गरमा गया।
साहिल केस और पैलेट गन विवाद को लेकर पहले भी उठा था सवाल
पैलेट गन विवाद से जुड़ा साहिल का मामला भी हाल के दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। दिल्ली में छात्र आंदोलनों के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से साहिल के प्रभावित होने का दावा किया गया है। इसी मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया था।
राहुल गांधी के धरने के बाद दर्ज हुई FIR
राहुल गांधी करीब पांच घंटे तक पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठे रहे। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। अब गृह मामलों की कमेटी में भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
राहुल गांधी का गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर सवाल
राहुल गांधी ने साहिल की चोटों का जिक्र करते हुए दावा किया कि उसके शरीर में 200 से ज्यादा छर्रे लगे हैं और उसकी आंख में भी तीन छर्रे लगे हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच अपनी जगह जारी रहनी चाहिए, लेकिन यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि कथित तौर पर कील लगी लाठियों के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था।
पुलिस कार्रवाई के आदेश पर उठाया सवाल
राहुल गांधी ने सवाल किया कि क्या छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई का आदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था या किसी अन्य स्तर से यह निर्देश जारी हुआ था। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कार्रवाई का आदेश गृह मंत्री की ओर से दिया गया था, तो छात्रों पर हुए कथित हमले की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उनके इस बयान ने पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है।
जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी
इस बीच जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस-सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। अदालत को उम्मीद है कि कमेटी की रिपोर्ट आगे की सुनवाई और फैसले में महत्वपूर्ण सहायता करेगी।
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी करेगी पुलिस कार्रवाई की जांच
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पांच सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता पूर्व चीफ जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी को सौंपी गई है। कमेटी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस तथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी। इस जांच की रिपोर्ट से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग प्रदर्शनों के दौरान परिस्थितियां किस तरह बिगड़ीं और कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई।
दिल्ली में CJP के विरोध मार्च का ऐलान
इसी राजनीतिक माहौल के बीच कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने दिल्ली में 5 सितंबर को शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। पार्टी ने केंद्र सरकार पर युवाओं से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। CJP के मुताबिक, 25 जुलाई को युवाओं से किए गए वादों को एक महीने बाद भी लागू नहीं किया गया है।
युवाओं से किए वादों को लेकर केंद्र पर CJP का हमला
CJP का आरोप है कि सरकार वादों को लागू करने में देरी कर रही है और स्पष्ट आश्वासन देने से बच रही है। पार्टी ने दावा किया कि तकनीकी खामियों और अन्य कारणों का हवाला देकर मामले को टालने की कोशिश की जा रही है। साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के सामने भी इस मुद्दे पर स्पष्ट प्रतिबद्धता जताने से बच रही है।
दिल्ली में सियासी तापमान बढ़ा
एक तरफ संसद की गृह मामलों की कमेटी में पैलेट गन और जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव देखने को मिला, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी के आरोपों और सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब 5 सितंबर को प्रस्तावित CJP के विरोध मार्च के बीच दिल्ली में इस मुद्दे पर सियासी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।










