Pax Silica: 20 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारत आधिकारिक तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाले महत्वपूर्ण रणनीतिक गठजोड़ ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) में शामिल हो गया है। इस गठबंधन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर, एआई और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देना और लोकतांत्रिक देशों के बीच एक सुरक्षित सप्लाई चेन बनाना है। इस अवसर पर भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दोनों देशों के भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की और द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: मतभेदों का अंत और नई शुरुआत
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील पर जल्द ही हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल टैरिफ कम करने या व्यापारिक आंकड़ों को बढ़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह दो महान लोकतांत्रिक देशों के बीच साझा विकास की प्रतिबद्धता है। गोर के अनुसार, दोनों पक्षों ने वर्षों से चले आ रहे तकनीकी और व्यापारिक मतभेदों को सुलझा लिया है। रक्षा संबंधों और पैक्स सिलिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास मिलकर काम करने के अब “अपार अवसर” मौजूद हैं।
रूसी तेल पर अमेरिका का रुख और मार्को रुबियो का भारत दौरा
सर्जियो गोर ने जानकारी दी कि संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो जल्द ही भारत का दौरा करेंगे। इस दौरान तेल खरीद और ऊर्जा सुरक्षा पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। राजदूत ने रूसी तेल के मुद्दे पर अमेरिका की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वाशिंगटन चाहता है कि कोई भी देश रूस से तेल न खरीदे ताकि रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कर शांति स्थापित की जा सके। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे पर बहुत स्पष्ट हैं और अमेरिका का लक्ष्य वैश्विक ऊर्जा बाजार से रूसी राजस्व को कम करना है।
ऊर्जा विकल्पों में विविधता: वेनेजुएला से तेल खरीदने की तैयारी
न्यूज एजेंसी एएनआई और रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में सर्जियो गोर ने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विकल्पों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत अब वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहा है। गोर के अनुसार, भारत ने तेल के क्षेत्र में अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई किया है, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, रूसी तेल पर पूरी तरह रोक लगाने को लेकर भारत की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी खेमे में इसे लेकर काफी सक्रियता देखी जा रही है।
ट्रंप के दावे और रूस की प्रतिक्रिया: विरोधाभास की स्थिति
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, रूस ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें नई दिल्ली से ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह रुख अपनाया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और जनता को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए फैसले लेगा। हालांकि भारत वेनेजुएला जैसे अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, लेकिन रूसी तेल की खरीद पर पूर्ण विराम को लेकर स्थिति अभी भी कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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