पंजाब के मजदूर माता-पिता की बेटी परम पहुंची UK में गाने की रिकॉर्डिंग करने

अमृतसर. मोगा जिले के गांव दुननेके में जन्मी परमजीत उर्फ परम ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली है। गरीब परिवार में जन्मी 19 वर्षीय परम ने कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया पर अपने रैप वीडियो से धमाल मचाया। उनका गाना नहीं, बल्कि सड़कों और गलियों में किया गया रैप लोगों के दिलों को छू गया, जिसके बाद फैंस ने उन्हें प्यार से ‘दैट गर्ल’ का नाम दिया। परम का बचपन गरीबी में बीता। मां दूसरों के घर झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करती थीं, जबकि पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे। बावजूद इसके, परम ने बीएम

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Published On :

जनवरी 5, 2026

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अमृतसर.

मोगा जिले के गांव दुननेके में जन्मी परमजीत उर्फ परम ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली है। गरीब परिवार में जन्मी 19 वर्षीय परम ने कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया पर अपने रैप वीडियो से धमाल मचाया। उनका गाना नहीं, बल्कि सड़कों और गलियों में किया गया रैप लोगों के दिलों को छू गया, जिसके बाद फैंस ने उन्हें प्यार से ‘दैट गर्ल’ का नाम दिया।

परम का बचपन गरीबी में बीता। मां दूसरों के घर झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करती थीं, जबकि पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे। बावजूद इसके, परम ने बीएम कॉलेज मोगा में पढ़ाई के साथ अपने संगीत करियर को आगे बढ़ाया। उन्होंने एक क्लासमेट के साथ मोगा दाना मंडी में गाने का रियाज किया, जो उन्हें रातों-रात स्टार बना गया। सोशल मीडिया पर उन्हें लेडी सिद्धू मूसेवाला का स्वरूप बताया गया और वे पंजाब में ट्रेंड करने लगीं।

यूके में नई शुरुआत

अपने कॅरिअर को आगे बढ़ाने के लिए परम अब यूके पहुंच चुकी हैं, जहां वे अपने आगामी गाने की रिकॉर्डिंग कर रही हैं। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में परम ने अपनी नई यात्रा की झलक दी। उन्होंने बताया कि वहाँ सब अच्छा है, लेकिन भारत जैसा खाना नहीं मिल रहा। चाइनीज खाने के लिए वह चाइनाटाउन पहुंचीं, लेकिन चॉपस्टिक से खाने में असफल रहीं। शूटिंग के दौरान कड़ाके की ठंड में कंबल में लिपटकर समय बिताना पड़ा। वहीं, यूके में फैंस ने उन्हें पहचानना शुरू कर दिया, और लोग उनके साथ सेल्फी लेने पहुंचे।

प्रेरणा की मिसाल

एक मेहनती मजदूर परिवार की बेटी ने जिस मुकाम को हासिल किया है, वह देश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है। परम ने साबित किया कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, हौसला, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।

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