Paper Leak: यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द, एसटीएफ ने धोखाधड़ी गैंग पकड़ा

उत्तर प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों का इंतजार एक बार फिर बढ़ गया है। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को योगी सरकार ने भ्रष्टाचार और पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। एसटीएफ की रडार पर आए महबूब अली ने पूछताछ में जो राज उगले हैं, उन्होंने पूरे शिक्षा विभाग को हिलाकर रख दिया है। आखिर अब कब होगी दोबारा परीक्षा?

Paper Leak

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 7, 2026

Paper Leak: उत्तर प्रदेश में सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) की परीक्षा रद्द कर दी गई है। राज्य की एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने इस परीक्षा में व्यापक धांधली और अवैध धन वसूली का पता लगाया। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया।

सीएम योगी ने दी गोपनीय जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा की गोपनीय और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह परीक्षा अप्रैल 2025 में विज्ञापन संख्या 51 के तहत सहायक आचार्य पद के लिए आयोजित की गई थी।

एसटीएफ ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

एसटीएफ को मिली जानकारी के आधार पर 20 अप्रैल 2025 को महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया गया। ये आरोपी फर्जी प्रश्न पत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने में शामिल पाए गए। यह परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित हुई थी। आरोपियों पर परीक्षा में धांधली और अवैध धन वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं।

आयोग के कर्मचारी का खुलासा

जांच में सामने आया कि महबूब अली उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान उसने विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र निकाल लिए और इन्हें कई अभ्यर्थियों को धन लेकर उपलब्ध कराया।

एसटीएफ ने पुष्टि की स्वीकारोक्ति

महबूब अली की इस स्वीकारोक्ति की एसटीएफ ने गहन विवेचना और डेटा विश्लेषण के माध्यम से पुष्टि की। जांच में यह भी सामने आया कि आयोग के कर्मचारियों और बाहरी गैंग के सदस्य मिलकर परीक्षा में व्यापक रूप से अनियमितताओं को अंजाम दे रहे थे।

आयोग अध्यक्ष का इस्तीफा

जांच की निष्पक्षता और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए तत्कालीन आयोग की अध्यक्ष से इस्तीफा लिया गया। यह कदम यह दर्शाता है कि प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं बरती।

छात्रों और अभ्यर्थियों पर असर

इस परीक्षा के रद्द होने से हजारों छात्रों की तैयारी और भविष्य पर असर पड़ा है। आयोग अब नई तिथि पर परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। छात्रों को इस स्थिति में धैर्य बनाए रखना होगा और नई परीक्षा की तैयारी करनी होगी।उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा घोटाले ने शिक्षा प्रणाली में सुरक्षा और पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर किया है। सरकार और एसटीएफ की तत्पर कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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