UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मिर्जापुर और विंध्य क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। अपना दल (सोनेलाल) की विधायक रिंकी कोल के ससुर और पूर्व सांसद पकौड़ी लाल कोल ने अलग राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले से केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है। पकौड़ी लाल कोल का लंबे समय से इस क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव रहा है। ऐसे में उनकी नई पार्टी आने वाले चुनाव में क्या भूमिका निभाएगी, इस पर चर्चा शुरू हो गई है।
रिंकी कोल को टिकट मिलने से नाराज थे पकौड़ी लाल कोल?

बताते चले कि, पकौड़ी लाल कोल के बेटे राहुल कोल छानबे विधानसभा सीट से विधायक थे। उनके निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें अपना दल (एस) ने राहुल कोल की पत्नी रिंकी कोल को टिकट दिया। रिंकी कोल चुनाव जीतकर विधायक बनीं। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक पकौड़ी लाल कोल खुद भी छानबे सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन पार्टी ने उनकी जगह उनकी बहू को उम्मीदवार बनाया। इसी फैसले के बाद उनकी नाराजगी की चर्चा सामने आई थी।
अब पकौड़ी लाल कोल ने समर्थकों के साथ बैठक करने के बाद अलग पार्टी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र के लोग पिछले 25 से 30 वर्षों से उनका समर्थन करते आ रहे हैं। उनके मुताबिक, समर्थकों ने ही नई पार्टी बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। हालांकि, नई पार्टी के नाम, संगठन और आगे की रणनीति को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
अनुप्रिया पटेल की पार्टी के लिए विंध्य क्षेत्र में बढ़ सकती है चुनौती
मिर्जापुर और आसपास के जिलों में कोल समुदाय के मतदाताओं की मौजूदगी चुनावी समीकरणों के लिहाज से अहम मानी जाती है। पकौड़ी लाल कोल लंबे समय से इसी क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में अगर वह अपनी नई पार्टी का मजबूत संगठन तैयार कर लेते हैं और स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाने में सफल रहते हैं, तो अपना दल (एस) के लिए मुकाबला चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, नई पार्टी के गठन से अपना दल (एस) का वोट बैंक बंटना तय नहीं है। चुनाव में इसका कितना असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पकौड़ी लाल कोल कितने उम्मीदवार उतारते हैं, उनका संगठन कितना मजबूत होता है और जनता उन्हें कितना समर्थन देती है। 2027 के चुनाव में ही उनके राजनीतिक प्रभाव की असली तस्वीर सामने आएगी।
पूर्व डीएम दिव्या मित्तल की पार्टी से भी बदलेगा सियासी माहौल?
विंध्य क्षेत्र की राजनीति में एक और घटनाक्रम पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल की राजनीतिक एंट्री से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने ‘जननीति भारत’ नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाई है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र में नए राजनीतिक विकल्प सामने आ रहे हैं।

पकौड़ी लाल कोल और दिव्या मित्तल की राजनीतिक पहल से मिर्जापुर समेत आसपास के इलाकों में नए मुद्दों और संभावित चुनावी समीकरणों पर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, किसी नए राजनीतिक दल की मौजूदगी अपने आप में चुनावी सफलता की गारंटी नहीं होती। इसके लिए मजबूत संगठन, स्थानीय मुद्दों की समझ और मतदाताओं के बीच भरोसा जरूरी होगा।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नए सियासी समीकरणों पर नजर
पकौड़ी लाल कोल की नई पार्टी का ऐलान अपना दल (एस) के लिए कितना असरदार साबित होगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा। पार्टी के सामने अपने मौजूदा जनाधार को बनाए रखने और स्थानीय नेताओं के साथ तालमेल मजबूत रखने की चुनौती रह सकती है। वहीं, पकौड़ी लाल कोल के लिए सबसे बड़ा सवाल अपनी राजनीतिक पकड़ को नए संगठन में बदलने का होगा।
फिलहाल मिर्जापुर और विंध्य क्षेत्र में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक दावेदार सामने आ गए हैं। अब देखना होगा कि पकौड़ी लाल कोल की नई पार्टी चुनावी मैदान में कितनी मजबूती से उतरती है और क्या वह अनुप्रिया पटेल की पार्टी के समीकरणों को प्रभावित कर पाती है।










