Pakistan vs India: पाकिस्तानी सेना की प्रॉपगैंडा विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पाकिस्तान के मुख्य सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि भारत अफगानिस्तान में काम कर रहे आतंकवादी समूहों के साथ सांठगांठ कर पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। उनके मुताबिक, भारत के इस समर्थन के कारण पाकिस्तान को 2025 में अभूतपूर्व सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी के बयानों का सार
आईएसपीआर के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि आतंकवादी संगठन अफगान क्षेत्र को अपने ऑपरेशनल बेस के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि फंडिंग और समर्थन भारत से आ रहा है। उन्होंने इसे आतंकवाद से जुड़े नए निवेश पैटर्न का हिस्सा बताया और कहा कि पाकिस्तान को प्रभावित करने वाला सबसे प्रमुख पैटर्न भारत की ओर इशारा करता है।
अफगानिस्तान को आतंकवाद का ऑपरेशनल बेस बताया
चौधरी ने कहा कि अफगानिस्तान पाकिस्तान को निशाना बनाने वाले आतंकवादी समूहों के लिए ऑपरेशन का आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र कई आतंकी संगठन जैसे बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लिए गतिविधियों का केंद्र बन गया है। उनका कहना था कि अफगानिस्तान से संचालित ये समूह पाकिस्तान में आतंक फैलाने में सक्रिय हैं।
अफगान युद्ध अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रवाह
डीजी आईएसपीआर ने कहा कि अफगानिस्तान की “युद्ध अर्थव्यवस्था” आतंकवाद का एक बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण पर लगभग 147 बिलियन डॉलर खर्च किए गए, लेकिन इसका सही इस्तेमाल नहीं हुआ। चौधरी ने कहा कि जब वित्तीय प्रवाह रुक जाता है, तो संघर्ष पर निर्भर समूह अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए क्षेत्र में आतंक फैलाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सैन्य उपकरण, जिसमें 7.2 बिलियन डॉलर के उन्नत हथियार शामिल हैं, अफगानिस्तान में पीछे छोड़ दिए गए। इसी दौरान अफगान क्षेत्र में राजनीतिक और आंतरिक सुविधा प्रदान की गई थी।
पाकिस्तान ने सुरक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाया
चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान ने 2023 में आतंकवादी तत्वों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने 2021 के बाद अफगानिस्तान में हुए घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए बताया कि आतंकवाद का परिदृश्य बदल गया है और इस क्षेत्र का उपयोग आतंक फैलाने के लिए किया जा रहा है।
दोहा समझौते और असफल वादे
डीजी आईएसपीआर ने अफगान तालिबान, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच हुए दोहा समझौते का भी जिक्र किया। इस समझौते में एक समावेशी सरकार बनाने, आतंकवाद के लिए अफगान क्षेत्र के इस्तेमाल को रोकने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने का वादा किया गया था। लेकिन चौधरी के अनुसार ये वादे पूरे नहीं हुए। अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों द्वारा जारी रहा।
पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताएं
पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान और भारत से जुड़े आतंकवाद को गंभीर खतरे के रूप में देख रहा है। उनका मानना है कि आतंकवादी समूहों की गतिविधियों को नियंत्रित करना और भारत की कथित भूमिका को उजागर करना पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है।
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