Pakistan Economy Crisis : गंभीर आर्थिक मंदी, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कर्ज के बोझ से दबा पाकिस्तान अब वित्तीय मदद के लिए नए रास्तों की तलाश कर रहा है। इसी कड़ी में इस्लामाबाद ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पहली बार चीन के घरेलू पूंजी बाजार में “पांडा बॉन्ड” (Panda Bond) जारी किया है। पाकिस्तान के इस कदम को एक बड़े आर्थिक दांव के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य चीन के संपन्न निवेशकों से सीधे तौर पर धन जुटाना है। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को इस बॉन्ड की सफल लॉन्चिंग के साथ ही पाकिस्तान ने चीनी बाजार से अरबों रुपये जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त मंत्री के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने इस ऐतिहासिक वित्तीय घटनाक्रम की पुष्टि की है।
पांडा बॉन्ड की विशेषताएं: चीनी युआन में कर्ज लेने की नई रणनीति
इस नए वित्तीय साधन के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए खुर्रम शहजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया कि यह पहला पांडा बॉन्ड 3 साल की निश्चित (फिक्स्ड) ब्याज दर वाला इंस्ट्रूमेंट है। यह पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार है जब सरकारी स्तर पर चीनी मुद्रा ‘युआन’ (RMB) में बॉन्ड की बिक्री की गई है। पांडा बॉन्ड दरअसल एक ऐसा बॉन्ड होता है जिसमें कोई विदेशी सरकार या बहुराष्ट्रीय कंपनी चीन के घरेलू बाजार से चीनी मुद्रा में ऋण लेती है। इस प्रक्रिया के माध्यम से चीन के निवेशक पाकिस्तान सरकार को फंड मुहैया कराएंगे, जिसका उपयोग पाकिस्तान अपनी वर्तमान आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगा और तीन साल की अवधि के बाद इसे ब्याज सहित लौटाएगा।
कर्ज का बढ़ता जाल या राहत की उम्मीद: विशेषज्ञों की क्या है राय?
सीधे शब्दों में कहें तो पांडा बॉन्ड के जरिए पाकिस्तान पर कर्ज का बोझ और बढ़ना तय है। हालांकि, पाकिस्तानी हुक्मरान इसे एक रणनीतिक अवसर के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका मानना है कि डॉलर की तुलना में युआन में कर्ज लेना विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकता है। इसके साथ ही, चीन के निवेशकों का भरोसा जीतना अंतरराष्ट्रीय साख सुधारने की दिशा में एक कदम हो सकता है। यदि पाकिस्तान इस राशि का सही उपयोग करता है और समय पर भुगतान कर पाता है, तो यह उसके भविष्य के लिए फायदेमंद होगा। लेकिन विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो यह बॉन्ड उसे कर्ज के दलदल में और गहरे धकेल सकता है।
वैश्विक स्तर पर झोली फैलाता इस्लामाबाद: कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज
पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति ऐसी हो गई है कि उसे पुराने कर्ज चुकाने के लिए भी नई उधारी लेनी पड़ रही है। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों से फंड जुटाने की कोशिश की है। पिछले महीने ही पाकिस्तान ने 75 करोड़ डॉलर जुटाने के लिए यूरोबॉन्ड (Eurobond) जारी किया था। इसके अलावा, सऊदी अरब ने जमा राशि के रूप में पाकिस्तान को अतिरिक्त 3 अरब डॉलर का ऋण दिया। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को पाकिस्तान ने 3.4 अरब डॉलर वापस लौटाए हैं। हाल ही में आईएमएफ (IMF) ने भी ईएफएफ (EFF) और आरएसएफ (RSF) किश्तों के रूप में 1.3 अरब डॉलर की मंजूरी देकर पाकिस्तान को थोड़ी राहत प्रदान की है।
रणनीतिक यात्रा और भविष्य की योजनाएं: वित्त मंत्री औरंगजेब का चीन दौरा
इस पांडा बॉन्ड के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके जारी होने के आधिकारिक समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के संघीय वित्त और राजस्व मंत्री मोहम्मद औरंगजेब विशेष रूप से चीन रवाना हुए थे। पाकिस्तान सरकार की योजना इस बॉन्ड के माध्यम से न केवल पूंजी जुटाना है, बल्कि चीन के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापार और वित्तीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना भी है। पाकिस्तान अब इस कोशिश में है कि उसे डॉलर आधारित अर्थव्यवस्था पर अपनी निर्भरता कम करने का कोई विकल्प मिल जाए, ताकि वैश्विक बाजार की अस्थिरता से बचा जा सके। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पांडा बॉन्ड पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए तिनके का सहारा साबित होता है या बोझ।
Read More:बिहार में ‘नीरा’ को बढ़ावा, समस्तीपुर में 157 बिक्री केंद्रों से मिलेगी प्राकृतिक ड्रिंक










