Owaisi का BJP-RSS पर हमला ‘भारत को धर्मशासित देश बना रही है सरकार’

असदुद्दीन ओवैसी ने BJP और RSS पर भारत को 'धर्मशासित देश' बनाने का आरोप लगाया है। गृह मंत्रालय द्वारा वंदे मातरम के लिए नई गाइडलाइंस और वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को देशभक्ति के लिए किसी 'वफादारी सर्टिफिकेट' की जरूरत नहीं है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 14, 2026

Owaisi News: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और सत्ताधारी विचारधारा पर कड़ा प्रहार किया है। शनिवार को एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मिलकर भारत की संवैधानिक साख को बदलकर इसे एक धर्मशासित देश में तब्दील करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

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वंदे मातरम के नए नियमों पर विवाद और वफादारी का टेस्ट

बताते चले कि, यह विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। नए नियमों के अनुसार, किसी भी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के सभी छह छंदों का गायन अनिवार्य होगा, यदि वहां राष्ट्रगान भी गाया जा रहा है। ओवैसी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति को किसी विशेष गीत या नारे से जोड़कर नागरिकों की वफादारी का परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह के थोपे गए नियम देश के समावेशी ढांचे के खिलाफ हैं।

संवैधानिक अधिकारों और आर्टिकल 25 की दुहाई

आपको बता दे कि, ओवैसी ने संविधान की प्रस्तावना का हवाला देते हुए याद दिलाया कि हमारा लोकतंत्र ‘हम भारत के लोग’ से शुरू होता है, न कि किसी विशेष धार्मिक या राष्ट्रवादी नारे से। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 (Article 25) हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और उसके अनुसार आचरण करने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार राष्ट्रगान के महत्व को कम करना चाहती है? उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी भारतीय को अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए किसी ‘सर्टिफिकेट’ की आवश्यकता नहीं है।

सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर तीखी आलोचना

RSS प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न देने के सुझाव पर भी ओवैसी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि जस्टिस कपूर कमीशन ने महात्मा गांधी की हत्या की साजिश में सावरकर की भूमिका का उल्लेख किया था। ओवैसी ने कटाक्ष करते हुए यहाँ तक कह दिया कि यदि सरकार का यही रवैया रहा, तो वे भविष्य में नाथूराम गोडसे को भी सर्वोच्च नागरिक सम्मान दे सकते हैं।

हिंदुत्व की राजनीति और धर्मनिरपेक्षता पर संकट

AIMIM चीफ का तर्क है कि ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्ष के बहाने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को थोपना असल में हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संवैधानिक मूल्यों के ऊपर धार्मिक प्रतीकों को तरजीह दी गई, तो भारत अपनी धर्मनिरपेक्ष पहचान खो देगा। ओवैसी के अनुसार, BJP और RSS की यह जुगलबंदी देश की विविधता के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है।

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