UP Politics: JPNIC विवाद में अखिलेश पर बरसे राजभर, बोले- लीज और बिक्री में फर्क समझें

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और सुभासपा के बीच जुबानी थमने का नाम नहीं ले रही है. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया कि अगर अखिलेश यादव अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं तो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएंगे। उन्होंने अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें वहां से चुनाव लड़ने में डर लग रहा है तो वह गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट पर आकर

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 12, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और सुभासपा के बीच जुबानी थमने का नाम नहीं ले रही है. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया कि अगर अखिलेश यादव अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं तो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएंगे। उन्होंने अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें वहां से चुनाव लड़ने में डर लग रहा है तो वह गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट पर आकर उनसे मुकाबला कर सकते हैं।

आपको बता दे कि, ओपी राजभर के इस बयान से प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती खुद अखिलेश यादव ने दी थी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे स्वीकार कर लिया है। ऐसे में अब अखिलेश यादव को मैदान में उतरकर अपनी चुनौती साबित करनी चाहिए। हालांकि, राजभर का यह बयान राजनीतिक दावा है, चुनावी नतीजे नहीं।

राजभर ने JPNIC विवाद पर अखिलेश यादव को घेरा

ओम प्रकाश राजभर ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख को लीज पर देने और संपत्ति बेचने के बीच का अंतर समझना चाहिए। राजभर के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जेपीएनआईसी को 30 साल की लीज पर दिया है, न कि उसे बेच दिया है। उन्होंने अखिलेश यादव के बिक्री संबंधी आरोपों पर सवाल उठाते हुए सरकार के फैसले का बचाव किया।

राजभर ने JPNIC विवाद पर अखिलेश यादव को घेरा

राजभर ने जेपीएनआईसी परियोजना की लागत का जिक्र करते हुए दावा किया कि शुरुआत में इसकी लागत करीब 200 करोड़ रुपये थी, जो समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान बढ़कर 865 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बावजूद परियोजना पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने इस मामले में सपा सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए और परियोजना से जुड़े प्रबंधन को लेकर भी आरोप लगाए।

JPNIC के प्रबंधन और करीबियों को लेकर राजभर के गंभीर आरोप

कैबिनेट मंत्री ने दावा किया कि जेपीएनआईसी के आठ सदस्यों में से सात अखिलेश यादव के करीबी थे और सपा प्रमुख खुद भी इससे जुड़े हुए थे। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि संस्थान के होटल, क्लब और कमाई के दूसरे साधनों पर अखिलेश यादव और उनके परिवार के लोगों का प्रभाव था। इन आरोपों को लेकर राजभर ने सपा प्रमुख से सवाल किए।

JPNIC के प्रबंधन और करीबियों को लेकर राजभर के गंभीर आरोप

हालांकि, जेपीएनआईसी के प्रबंधन और उससे जुड़े लोगों को लेकर राजभर की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इन बयानों के आधार पर नहीं होती। इस मुद्दे पर अखिलेश यादव का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल राजभर ने इन आरोपों के जरिए जेपीएनआईसी को लेकर सपा और भाजपा के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है।

अखिलेश यादव के पांच साल के शासन पर भी उठाए सवाल

राजभर ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़ और इस मामले में उत्तर प्रदेश के लोगों को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सपा प्रमुख को उनके पांच साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल को भी देखना चाहिए।

अखिलेश यादव के पांच साल के शासन पर भी उठाए सवाल

राजभर ने पुलिस की भूमिका का बचाव करते हुए सवाल किया कि अगर कोई पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी करेगा तो क्या पुलिस उस पर फूल बरसाएगी? उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपनी सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे देश की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होती है।

यूपी की राजनीति में बयानबाजी तेज

ओम प्रकाश राजभर के इन बयानों में अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती, जेपीएनआईसी की लीज और बिक्री का विवाद और पुलिस की भूमिका जैसे कई राजनीतिक मुद्दे शामिल हैं। राजभर ने इन सभी मामलों में अखिलेश यादव को घेरते हुए योगी सरकार के फैसलों का समर्थन किया है। अब इस बयानबाजी पर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया और आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव पर नजर रहेगी।