Oman Oil Tanker Attack: ईरान ने रविवार को ओमान के मुसैंडम प्रायद्वीप के निकट समुद्री क्षेत्र में एक बड़े तेल टैंकर को निशाना बनाया। यह हमला पलाऊ ध्वज वाले ‘स्काईलाइट’ नामक जहाज पर किया गया, जो तट से लगभग पांच समुद्री मील की दूरी पर मौजूद था। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हमले के समय जहाज नियमित मार्ग पर था और क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां जारी थीं। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
20 चालक दल सुरक्षित निकाले गए, चार घायल
हमले के तुरंत बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। जहाज पर सवार सभी 20 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इनमें 15 भारतीय क्रू मेंबर भी शामिल थे। हालांकि हमले में चार लोग घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, जहाज को आंशिक क्षति पहुंची है, लेकिन बड़ी पर्यावरणीय आपदा टल गई। घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र में समुद्री निगरानी और बढ़ा दी गई है।
ट्रंप की दोबारा चेतावनी, बड़े जवाबी हमले का दावा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि हमले जारी रहे तो अमेरिका ऐसा जवाब देगा, “जो पहले कभी नहीं देखा गया होगा।” ट्रंप के बयान के तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर कार्रवाई तेज कर दी। तेहरान में कई स्थानों पर विस्फोटों की खबरें सामने आईं। अमेरिकी सूत्रों का दावा है कि इस कार्रवाई में ईरान के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी, मिलिट्री चीफ मुसावी, मारे गए हैं।
मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज
दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। रिपोर्टों के मुताबिक, इज़रायल समेत पूरे मिडिल-ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जा रहा है। क्षेत्र में तनाव चरम पर है और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
नेतन्याहू का आह्वान, ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने की अपील
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में “आतंकवादी शासन” के हजारों लक्ष्यों पर हमले किए जाएंगे। नेतन्याहू ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर है, जिसे गंवाना नहीं चाहिए। उन्होंने फारसी, कुर्द, अजरबैजानी, अहवाज़ी और बलूची समुदायों से एकजुट होकर शासन के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया।
क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा
नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि अब समय आ गया है जब लोग लाखों की संख्या में सड़कों पर उतरकर अपने भविष्य का फैसला करें। उनके इस बयान ने क्षेत्रीय राजनीति को और गरमा दिया है। पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और तीखी बयानबाजी ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिन इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे और इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।










