Korean Border Tensions : कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ा तनाव, दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया को दी कड़ी चेतावनी

उत्तर कोरिया की सैन्य धमकी के बाद दक्षिण कोरिया ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। सीमा पर लाउडस्पीकर विवाद, बारूदी सुरंगों और चेतावनी वाली गोलीबारी से तनाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों को आशंका है कि एक छोटी-सी गलतफहमी भी बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकती है। क्या कूटनीति तनाव रोक पाएगी?

Korean Border Tensions

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 20, 2026

Advertisements
728x90-Kanya-Sumangla-Mission-Shakti-Digital

Korean Border Tensions :  उत्तर कोरिया की ओर से सीमा पर सैन्य गतिविधियां बढ़ाने और दक्षिण कोरिया की दिशा में लाउडस्पीकर प्रसारण दोबारा शुरू करने की धमकी के बाद कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ गया है। दक्षिण कोरिया ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया ने कोई नई उकसावे वाली कार्रवाई की, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य गतिविधियों से सशस्त्र संघर्ष का खतरा बढ़ने की आशंका है।

दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया से क्या कहा?

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सैन्य सीमा रेखा के पास की गई चेतावनी संबंधी घोषणाएं और चेतावनी के तौर पर की गई गोलीबारी वैध आत्मरक्षात्मक कदम हैं। सियोल के मुताबिक, इन कार्रवाइयों का उद्देश्य सीमा पार करने से रोकना और दक्षिण कोरियाई क्षेत्र में दाखिल होने वाले उत्तर कोरियाई सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर करना था।मंत्रालय ने प्योंगयांग से निराधार आरोप लगाना बंद करने, सैन्य सीमा पार नहीं करने और दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के प्रयासों में सहयोग करने की अपील की। उसने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के वैध कदमों को उकसावे का बहाना बनाया, तो उसे कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

Kim Jung Un
Kim Jung Un

सीमा पर सैन्य तैयारियां मजबूत करने के निर्देश

दक्षिण कोरिया की सेना के मुताबिक, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जिन योंग-सुंग ने सीमावर्ती सैन्य कमान का दौरा किया और सैनिकों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने असैन्यीकृत क्षेत्र यानी डीएमजेड में सैन्य निगरानी और नियंत्रण मजबूत करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए।जिन ने उत्तर कोरिया पर आरोप लगाया कि वह दक्षिण कोरिया की वैध सैन्य कार्रवाइयों को गलत तरीके से उकसावा बताकर तनाव बढ़ाने की जिम्मेदारी दक्षिण कोरियाई सेना पर डाल रहा है। उन्होंने पिछले महीने सैन्य सीमा के दक्षिण में बारूदी सुरंगें बिछाने और दक्षिण कोरियाई सैनिकों को गंभीर रूप से घायल करने के लिए भी उत्तर कोरिया को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इस घटना को उकसावा और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया।

किम यो-जोंग की चेतावनी से बढ़ा विवाद

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग ने पहले दक्षिण कोरिया पर सीमा पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि सीमा सुरक्षा में लगे उत्तर कोरियाई सैनिकों की ओर दक्षिण कोरिया की चेतावनी वाली गोलीबारी से उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।किम यो-जोंग ने जवाबी कदम के तौर पर सीमा पर लाउडस्पीकर से प्रचार दोबारा शुरू करने की धमकी भी दी। इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए उठाए गए कदमों पर सवाल खड़े हो गए हैं। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की सरकार ने लाउडस्पीकर प्रसारण रोकने को उत्तर कोरिया के साथ कूटनीतिक संपर्क बहाल करने की दिशा में शुरुआती सफलता बताया था।

सीमा पर बारूदी सुरंगें और सैनिकों की गतिविधियां बढ़ीं

दक्षिण कोरिया के अनुसार, उत्तर कोरिया अप्रैल 2024 से सीमा क्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछाने और सुरक्षा अवरोध बनाने का काम कर रहा है। दक्षिण कोरिया का दावा है कि उत्तर कोरिया ने इस साल इन गतिविधियों के लिए लगभग 7,000 कर्मचारियों को लगाया। इसके अलावा, उत्तर कोरियाई सैनिकों के लगभग 50 बार सैन्य सीमा पार करने की बात भी कही गई है।इन घटनाओं ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास को और गहरा किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि जवाबी सैन्य कदम लगातार बढ़ते रहे, तो छोटी-सी घटना भी बड़े टकराव का कारण बन सकती है।

क्या चेतावनी वाली गोलीबारी युद्ध में बदल सकती है?

कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के वरिष्ठ शोधकर्ता होंग मिन के मुताबिक, यदि उत्तर कोरिया की कथित उकसावे वाली कार्रवाइयों से निपटने के लिए दक्षिण कोरिया अपनी मौजूदा सैन्य नियमावली की सीमाओं से आगे बढ़ता है, तो बार-बार की जवाबी कार्रवाई संघर्ष को जन्म दे सकती है।संयुक्त राष्ट्र कमान के पूर्व अधिकारी और पार्ले पॉलिसी इंस्टीट्यूट के संस्थापक निदेशक माइकल बोसाक ने भी गलतफहमी के खतरे की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, सैनिक चेतावनी के तौर पर चलाई गई गोलियों को वास्तविक हमला समझ सकते हैं। ऐसी स्थिति में जवाबी गोलीबारी शुरू होने और तनाव के तेजी से बढ़ने का जोखिम रहता है।

फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बावजूद सीमा पर हालात संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले दिनों में उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियां और दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया यह तय करने में अहम होंगी कि स्थिति शांत होती है या टकराव और बढ़ता है।

Read More : Kim Jong Un Health : किम जोंग उन की सेहत पर बड़ा सवाल, बीजिंग ले जाने की अफवाहों में कितनी सच्चाई?