Rahul Gandhi: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा में पिछले पांच दिनों से जारी श्रमिकों के आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वह देश के उन श्रमिकों की “आखिरी चीख” थी, जिन्हें लंबे समय से अनसुना किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देश की रीढ़ माने जाने वाले मजदूरों को महज एक ‘बोझ’ समझ लिया है, जबकि वे बेलगाम महंगाई और कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं।
योगी सरकार का बड़ा फैसला
बताते चले कि, श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद राज्य के मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage Hike) में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने पुष्टि की है कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। ये संशोधित दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी। सरकार का यह कदम औद्योगिक अशांति को शांत करने और श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के लिए नई वेतन संरचना का विवरण
आधिकारिक बयान के अनुसार, दिल्ली से सटे एनसीआर क्षेत्रों यानी गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों (Unskilled Workers) का मासिक वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह, अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों (Skilled Labor) के लिए 16,868 रुपये की न्यूनतम मजदूरी तय की गई है। अन्य नगर निगम क्षेत्रों और शेष जिलों के लिए भी अलग-अलग स्लैब निर्धारित किए गए हैं, ताकि क्षेत्रीय महंगाई और जीवन स्तर के बीच संतुलन बनाया जा सके। यह निर्णय नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों के साथ लंबी मंत्रणा के बाद लिया गया है।
वैश्विक महंगाई, टैरिफ वॉर और लेबर कोड पर राहुल गांधी की चिंता
राहुल गांधी ने अपने बयान में केवल वेतन वृद्धि की बात नहीं की, बल्कि श्रमिकों की गिरती क्रय शक्ति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जहाँ एक मजदूर की तनख्वाह में मामूली बढ़ोतरी होती है, वहीं मकान मालिक किराया और गैस की कीमतें उससे कहीं ज्यादा बढ़ा देते हैं। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि ‘विकसित भारत’ का सच यह है कि पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन (Supply Chain Disruption) टूटने का खामियाजा गरीब मजदूर भुगत रहा है, जबकि मोदी जी के ‘मित्र’ उद्योगपतियों पर इसका कोई असर नहीं है। उन्होंने नवंबर 2025 से लागू होने वाले 4 लेबर कोड को लेकर भी सवाल उठाए, जिसके तहत काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे किए जाने का प्रावधान है।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद शांति बहाली
बता दें कि सोमवार को नोएडा की फैक्ट्रियों में काम करने वाले हजारों मजदूरों ने सड़कों पर उतरकर बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग की थी, जो कई स्थानों पर हिंसक हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है और सरकार ने एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति अब औद्योगिक असहमति (Industrial Disputes) को सुलझाने के लिए समन्वय का काम कर रही है। हालांकि, प्रशासन की सख्ती के बावजूद कुछ इलाकों से अभी भी छिटपुट प्रदर्शनों की खबरें आ रही हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।









