No Confidence Motion: लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा, ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश

लोकसभा में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने इसे 'संसदीय मर्यादा बचाने की जंग' बताया। 118 सांसदों के समर्थन वाले इस प्रस्ताव में स्पीकर पर पक्षपात और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया गया है। इस कदम ने संसद के भीतर एक नया संवैधानिक विवाद छेड़ दिया है।

No Confidence Motion

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 10, 2026

No Confidence Motion: विपक्ष ने संसदीय मर्यादा और निष्पक्षता का हवाला देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों का आरोप है कि सदन के संचालन में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।

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गौरव गोगोई का बयान

बताते चले कि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई ने इस कदम को वैचारिक और संवैधानिक लड़ाई करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संसद की गरिमा को बचाने के लिए उठाए गए कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। गोगोई के अनुसार, बिरला के साथ उनके निजी संबंध मधुर हो सकते हैं, लेकिन जब बात संविधान की रक्षा और सदन के नियमों की आती है, तो कर्तव्यों को प्राथमिकता देना हर सांसद की जिम्मेदारी है।

विपक्षी एकजुटता और 118 सांसदों का समर्थन

इस विधायी कार्रवाई को विपक्षी खेमे का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा औपचारिक रूप से पेश किए गए इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा है। विशेष रूप से, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने के पर्याप्त अवसर न दिए जाने और उनकी आवाज दबाने के प्रयासों को इस असंतोष का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

सदन के संचालन पर विवाद

प्रस्ताव पेश होने के साथ ही सदन के भीतर एक नया संवैधानिक संकट खड़ा हो गया कि सदन की अध्यक्षता को लेकर उपजा विवाद कैसे सुलझाया जाए। जिस समय यह प्रस्ताव लाया गया, उस समय जगदंबिका पाल सदन की कमान संभाल रहे थे। असदुद्दीन ओवैसी और सौगत रॉय जैसे नेताओं ने ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ के माध्यम से सवाल उठाया कि जब अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया विचाराधीन हो, तो उनके द्वारा नामित व्यक्ति कुर्सी पर कैसे बैठ सकता है।

जगदंबिका पाल का स्पष्ट रुख

विपक्ष के तीखे तेवरों के बीच जगदंबिका पाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में स्पीकर का पद रिक्त नहीं है, इसलिए सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता और निरंतरता बनाए रखने का उन्हें पूर्ण अधिकार है। यह भी जानकारी दी गई कि स्वयं ओम बिरला ने इस विशिष्ट बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का नैतिक निर्णय लिया है, ताकि प्रक्रिया की शुचिता पर कोई सवाल न खड़ा हो सके।

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