NITI Aayog Report: NITI आयोग के सीनियर लीड प्रवाकर Sahu ने न्यूज एजेंसी से बातचीत के चलते बताया कि साल 2025-26 जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत के एक्सपर्ट में 8.5 प्रतिशत की तेजी हुई है, जो कि पिछली तिमाही की तुलना में काफी बेहतरीन प्रदर्शन की ओर इशाका करता है, साथ ही वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के ट्रेड में मजबूती को इस हाच ती पुष्टि करता है। उन्होंने आगे कहा कि इंपोर्ट में 4.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो कि कंपेयर में संतुलित है।
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तिमाही रिपोर्ट: थीमैटिक फोकस इलेक्ट्रॉनिक्स
ट्रेड वॉच क्वार्टरली के छठे एडिशन में इस तिमाही के भारतीय ट्रेड के आंकड़े प्रकाशित किए गए हैं। रिपोर्ट में विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें भारत की ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में भागीदारी और विभिन्न कैटेगरी में एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस का विश्लेषण किया गया। साहू ने बताया कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट की वैल्यू लगभग 4.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है, जबकि भारत का हिस्सा केवल 1 प्रतिशत है।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में नीति और निवेश
साहू ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 40,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत ने असेंबली सेक्टर में अच्छी प्रगति की है, लेकिन अब कंपोनेंट्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। यह कदम देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में अधिक हिस्सेदारी दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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एक्सपोर्ट और इंपोर्ट का विस्तृत आंकड़ा

रिपोर्ट में बताया गया है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में एक्सपोर्ट मर्चेंडाइज़ और सर्विसेज़ दोनों में लगभग 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इंपोर्ट में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। भारत के टॉप एक्सपोर्ट रीजन में शिपमेंट का 89 प्रतिशत हिस्सा रहा, जिसमें नॉर्थ अमेरिका और यूरोपियन यूनियन सबसे आगे थे। वहीं, इंपोर्ट ग्रोथ मुख्य रूप से ईस्ट एशिया और लैटिन अमेरिका की वजह से 4.7 प्रतिशत रही।
इलेक्ट्रॉनिक्स: रणनीतिक स्तंभ
रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स को भारत के मैन्युफैक्चरिंग ट्रांसफॉर्मेशन में एक रणनीतिक स्तंभ बताया गया है। मोबाइल फोन का एक्सपोर्ट लगभग 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के करीब पहुंच चुका है। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड डेफिसिट बढ़ा है, जो 2016 में 35 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर लगभग 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। इसका कारण घरेलू मांग में वृद्धि और आवश्यक कंपोनेंट्स का आयात है।
साउथ-साउथ ट्रेड और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
साहू ने साउथ-साउथ ट्रेड के महत्व पर भी जोर दिया। भारत के विकासशील देशों के साथ एक्सपोर्ट 2005 में 56 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। उन्होंने बताया कि भारत ने लगभग 8-9 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन किए हैं, जो टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को कम करके बेहतर मार्केट एक्सेस प्रदान करते हैं।
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लेबर पार्टिसिपेशन और भविष्य की रणनीति
साहू ने लेबर की उपलब्धता पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन बढ़ा है और यह अब कमी का मुद्दा नहीं बल्कि विस्तार और भागीदारी बढ़ाने का विषय है। रिपोर्ट में लंबे समय तक प्रतिस्पर्धात्मक बने रहने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।









