Niger Tillabery Attack: नाइजर के तिल्लाबेरी में बंदूकधारियों का खूनी तांडव, भीषण हमले में 31 ग्रामीणों की मौत

पश्चिमी नाइजर का तिल्लाबेरी क्षेत्र एक बार फिर निर्दोषों के खून से लाल हो गया है। रविवार को मोटरसाइकिल सवार बंदूकधारियों ने बोसिये गांव को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें बच्चों और बुजुर्गों समेत 31 लोगों की जान चली गई। क्या यह हमला अल-कायदा या इस्लामिक स्टेट की नई रणनीति का हिस्सा है?

Niger Tillabery Attack

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 21, 2026

Niger Tillabery Attack: पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर एक बार फिर भीषण आतंकी हिंसा की चपेट में है। नाइजर के अशांत पश्चिमी क्षेत्र तिल्लाबेरी के एक गांव में अज्ञात बंदूकधारियों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर कम से कम 31 निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया। छात्र संगठनों और स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह वीभत्स हमला रविवार को ‘गोरोउल’ नामक स्थान पर हुआ। ‘यूनियन ऑफ नाइजीरियन स्टूडेंट्स’ और कई अन्य छात्र समूहों ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने बताया कि कानून और मानवीय मूल्यों की परवाह न करने वाले हमलावरों ने गांव में घुसकर कत्लेआम मचाया, जिससे पूरे इलाके में दहशत व्याप्त है।

हमले की भयावहता: 4 गंभीर रूप से घायल और भारी तबाही

इस भीषण हमले में केवल मौतें ही नहीं हुईं, बल्कि कई लोग अपंग भी हो गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कम से कम 4 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। फिलहाल किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन जिस बर्बरता से निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाया गया, वह इस क्षेत्र में सक्रिय चरमपंथी समूहों की कार्यशैली की ओर इशारा करता है। स्थानीय अधिकारियों ने क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है, लेकिन हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद जंगलों में ओझल हो गए।

चश्मदीदों का बयान: ‘इस्लामिक स्टेट इन ग्रेटर सहारा’ पर शक

गोरोउल गांव के एक निवासी हामिदौ अमादौ ने इस हत्याकांड की रूह कंपा देने वाली कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि बंदूकधारी अचानक गांव में दाखिल हुए और जो भी सामने आया, उस पर गोलियां बरसा दीं। अमादौ ने दावा किया कि इस हमले के पीछे ‘इस्लामिक स्टेट इन ग्रेटर सहारा’ (ISGS) का हाथ हो सकता है, क्योंकि यह संगठन इस इलाके में काफी समय से सक्रिय है और अक्सर इसी तरह के घातक हमलों को अंजाम देता है। नाइजर इस समय अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे कई प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है, जो सेना और नागरिक दोनों को निशाना बना रहे हैं।

सैन्य शासन और सुरक्षा के खोखले वादे: नाइजर में बिगड़ती स्थिति

नाइजर के राजनीतिक हालात भी इस हिंसा के लिए जिम्मेदार माने जा रहे हैं। साल 2023 में नाइजर की सेना ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार का तख्तापलट कर सत्ता अपने हाथ में ली थी। उस समय सैन्य जुंटा ने देशवासियों से वादा किया था कि वे चरमपंथी हिंसा पर पूरी तरह नियंत्रण पाएंगे। हालांकि, वास्तविकता इसके विपरीत है। आंकड़ों के अनुसार, सैन्य शासन आने के बाद से आतंकी हमलों की आवृत्ति और तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि रणनीतिक विफलता और विदेशी सैन्य सहयोग की कमी ने नाइजर को आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित चारागाह बना दिया है।

पुरानी यादें: चार महीने पहले भी हुआ था सैनिकों पर हमला

तिल्लाबेरी क्षेत्र लंबे समय से हिंसा का केंद्र रहा है। पिछली घटनाओं पर नजर डालें तो करीब चार महीने पहले, सितंबर में भी उग्रवादियों ने सेना की एक टुकड़ी पर घात लगाकर हमला किया था। उस हमले में 14 सैनिकों की मौत हुई थी। उस समय भी रक्षा मंत्री सलीफौ मोडी ने किसी विशिष्ट संगठन का नाम नहीं लिया था, लेकिन सुरक्षा बलों की बढ़ती शहादत देश की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। वर्तमान में नाइजर की जनता न केवल राजनीतिक अस्थिरता, बल्कि हर दिन मंडराते मौत के साये के बीच जीने को मजबूर है।

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