Nidal Hasan Execution: अमेरिका में निदाल हसन की फांसी का होगा लाइव प्रसारण, जानें पूरा मामला

अमेरिका में 2009 के फोर्ट हुड हमले के दोषी निदाल मलिक हसन को 3 दिसंबर 2026 को फायरिंग स्क्वॉड से मृत्युदंड देने की योजना है। पेंटागन ने इसके लाइव प्रसारण की बात कही है। छह दशक से अधिक समय बाद होने वाली इस कार्रवाई ने कानूनी और नैतिक बहस छेड़ दी है।

Nidal Hasan Execution

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 9, 2026

Nidal Hasan Execution : अमेरिका में पूर्व सैन्य अधिकारी निदाल मलिक हसन की प्रस्तावित फांसी को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, हसन को फायरिंग स्क्वॉड यानी गोली मारकर मृत्युदंड देने की योजना है। इस कार्रवाई का सीधा प्रसारण किए जाने की भी घोषणा की गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।

3 दिसंबर को प्रस्तावित है मृत्युदंड

रिपोर्टों के अनुसार, निदाल हसन को 3 दिसंबर 2026 को टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर मृत्युदंड दिया जाना निर्धारित किया गया है। यह वही सैन्य परिसर है, जहां वर्ष 2009 में गोलीबारी की घटना हुई थी। हालांकि, निर्धारित तारीख पर सजा का क्रियान्वयन कानूनी प्रक्रिया और संभावित अपीलों से प्रभावित हो सकता है।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने क्या कहा?

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक साक्षात्कार में कहा कि आम लोग इस कार्रवाई को देख सकेंगे। उनके मुताबिक, गंभीर अपराधों के परिणामों को समझाने के लिए सजा को सार्वजनिक रूप से दिखाने की योजना है। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल के अनुसार, फायरिंग स्क्वॉड से मृत्युदंड देने की सिफारिश हेगसेथ ने की थी, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी मिली।

2009 की फोर्ट हुड गोलीबारी में गई थीं 13 जानें

निदाल मलिक हसन अमेरिकी सेना में मेजर और सैन्य मनोचिकित्सक रह चुके हैं। 5 नवंबर 2009 को टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुई गोलीबारी में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 32 अन्य घायल हुए थे। घटना के समय कई सैनिक एक चिकित्सा केंद्र में मौजूद थे। इस हमले ने अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और सैनिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

सैन्य अदालत ने 2013 में सुनाई थी मौत की सजा

इस मामले में वर्ष 2013 में सैन्य अदालत ने हसन को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया था। सुनवाई के दौरान उन्होंने हमले में अपनी भूमिका स्वीकार की थी। उन्होंने अपने कृत्य के पीछे अफगानिस्तान में मुस्लिमों और तालिबान को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से बचाने की मंशा का दावा किया था। हालांकि, उनके इस तर्क से हमले में मारे गए लोगों और उनके परिवारों को हुए नुकसान की गंभीरता कम नहीं होती।

छह दशक से अधिक समय बाद ऐतिहासिक कार्रवाई

यदि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सजा लागू होती है, तो यह अमेरिकी सैन्य व्यवस्था में छह दशक से अधिक समय बाद किसी सैन्य सदस्य को मृत्युदंड देने का पहला मामला होगा। फायरिंग स्क्वॉड के जरिए सजा और उसके सीधे प्रसारण को लेकर कानूनी, नैतिक और मानवाधिकार संबंधी बहस भी तेज होने की संभावना है। इस फैसले पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

लाइव प्रसारण पर उठ रहे हैं सवाल

मृत्युदंड का सार्वजनिक प्रसारण पारदर्शिता, मानवीय गरिमा और हिंसक दृश्यों के प्रसार से जुड़े सवाल पैदा करता है। आलोचकों के लिए यह केवल सजा का मामला नहीं, बल्कि सरकारी कार्रवाई को सार्वजनिक तमाशे में बदलने की आशंका भी है। ऐसे में 3 दिसंबर की प्रस्तावित तारीख से पहले कानूनी स्थिति और प्रसारण की व्यवस्था पर आगे होने वाले घटनाक्रम अहम रहेंगे।

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