Nicotine Pouch Ban: देश के युवाओं के बीच तेजी से पैर पसार रहे तंबाकू-मुक्त निकोटीन पाउच को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सरकार ने इन उत्पादों की बिक्री, विज्ञापन और डिस्ट्रीब्यूशन पर पूरी तरह रोक लगाने के साथ-साथ इन्हें तत्काल जब्त करने का भी बड़ा आदेश जारी किया है। तंबाकू-मुक्त होने के दावे के साथ बेचे जा रहे इन सिंथेटिक निकोटीन पाउच को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं के लिए अत्यधिक नशीला और उनके दिल व दिमाग के लिए बेहद खतरनाक करार दिया है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के सख्त निर्देश और छापेमारी

बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश दिए हैं। इसके तहत ई-सिगरेट प्रतिबंध कानून (PECA 2019) और खाद्य सुरक्षा मानकों (FSSAI) का हवाला देते हुए ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजारों में तुरंत छापेमारी करने को कहा गया है। सरकार का यह कदम पान की दुकानों, ई-कॉमर्स वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को निशाना बनाने वाले इस नए और खतरनाक नशे के प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया है। आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल तंबाकू के सेवन के कारण लगभग 13.5 लाख लोगों की जान चली जाती है, जो एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय है।
तंबाकू कंपनियों की नई रणनीति और विकल्प
बाजार के जानकारों का मानना है कि सिगरेट पर कड़े प्रतिबंधों के बाद अब बड़ी तंबाकू कंपनियां उसके विकल्प के रूप में निकोटीन पाउच को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं। इन उत्पादों के जरिए कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, क्योंकि इन पर अब तक उतने कड़े नियम लागू नहीं थे जितने पारंपरिक तंबाकू उत्पादों पर हैं। हालांकि सरकार ने पहले ही ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन निकोटीन पैच और निकोटीन च्यूइंग गम जैसी चीजों को कुछ चिकित्सीय मानकों के तहत बेचने की अनुमति दी गई है। इसके बावजूद इन पाउच की आड़ में अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
क्या हैं निकोटीन पाउच और कैसे करते हैं काम?

निकोटीन पाउच छोटे-छोटे पैकेट या थैलियों के रूप में आते हैं, जिन्हें उपयोगकर्ता अपने होंठ और मसूड़े के बीच दबाकर रखते हैं। हालांकि इनमें पारंपरिक तंबाकू की पत्तियां नहीं होती हैं, बल्कि सिंथेटिक निकोटीन भरा होता है, जो बेहद तेजी से शरीर में घुलकर नशा पैदा करता है। भारत में इन्हें बेचने की कोई भी आधिकारिक सरकारी अनुमति नहीं है, जिसके कारण ये पूरी तरह अवैध हैं। इसके बावजूद तस्कर इन उत्पादों को चोरी-छिपे देश में ला रहे हैं और स्थानीय दुकानों या अवैध ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से युवाओं तक पहुंचा रहे हैं।
युवाओं में विदेशी ब्रांड्स का बढ़ रहा क्रेज

एक सरकारी अध्ययन से यह बात सामने आई है कि बिना किसी कानून के खुलेआम बिक रहे ये पाउच जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। खासकर 18 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं के बीच ‘ज़िन’ (ZYN) और ‘व्हाइट फॉक्स’ (White Fox) जैसे विदेशी ब्रांड्स का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। सरकार के इस नए और कड़े एक्शन से इस अवैध कारोबार पर लगाम कसने और देश की युवा पीढ़ी को इस गंभीर नशे की गिरफ्त से बचाने की उम्मीद बंधती है।
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