भोजशाला विवाद में नया मोड़, मुस्लिम पक्ष ने सभी याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई की तैयारी की

धार. धार के ऐतिहासिक भोजशाला प्रकरण में 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष ने अपनी कानूनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी का कहना है कि वह 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में मामले का मेंशन कर सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का अनुरोध करेगी, ताकि विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों की समग्र सुनवाई हो सके। सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष ने पहले ही कैविएट दायर कर दी है। इस दशा में सुप्रीम कोर्ट हिंदू पक्ष की दलील सुने बिना कोई अंतरिम राहत या स्थगन (स्टे) आदेश पारित

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Published On :

जुलाई 12, 2026

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धार.

धार के ऐतिहासिक भोजशाला प्रकरण में 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष ने अपनी कानूनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी का कहना है कि वह 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में मामले का मेंशन कर सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का अनुरोध करेगी, ताकि विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों की समग्र सुनवाई हो सके।

सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष ने पहले ही कैविएट दायर कर दी है। इस दशा में सुप्रीम कोर्ट हिंदू पक्ष की दलील सुने बिना कोई अंतरिम राहत या स्थगन (स्टे) आदेश पारित नहीं करेगा। धार के बहुचर्चित भोजशाला प्रकरण में एक बार फिर कानूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई को देखते हुए मुस्लिम पक्ष अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गया है। इस सिलसिले में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के साथ समन्वय भी किया जा रहा है।

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कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने बताया कि आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले का मेंशन कराया जाएगा। उनका कहना है कि उनकी मांग रहेगी कि भोजशाला विवाद से जुड़ी विभिन्न अदालतों में लंबित सभी याचिकाओं और प्रकरणों को एक साथ सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाए, जिससे अलग-अलग स्तर पर लंबित मामलों का समग्र निराकरण हो सके।

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में मुस्लिम समाज पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी तैयारी कर रहा है। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी आवश्यक कानूनी सहयोग उपलब्ध करा रही हैं। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल यह है कि सभी संबंधित पक्षों की दलीलें एक ही मंच पर सुनी जाएं और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।

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