नई स्टडी से खुलासा: मौत के बाद इंसान क्या-क्या सुन सकता है? जानिए हैरान कर देने वाले तथ्य

न्यूयॉर्क    सोचिए… आपका दिल धड़कना बंद कर देता है. डॉक्टर CPR रोक देते हैं. आपको ‘डेथ’ घोषित कर दिया जाता है,लेकिन आपका दिमाग अब भी जिंदा है,और आपको सब कुछ सुनाई दे रहा है.यहां तक कि डॉक्टर आपकी मौत का समय भी बोल रहे हों! मौत आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य बनी हुई है. इंसान के साथ मौत के बाद क्या होता है और आखिरी क्षणों में उसका अनुभव कैसा होता है.इस पर बहुत कुछ कहा जा चुका है. इन विषयों पर कई रिसर्च भी हो चुके हैं, लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने

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Published On :

मार्च 5, 2026

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न्यूयॉर्क
   सोचिए… आपका दिल धड़कना बंद कर देता है. डॉक्टर CPR रोक देते हैं. आपको ‘डेथ’ घोषित कर दिया जाता है,लेकिन आपका दिमाग अब भी जिंदा है,और आपको सब कुछ सुनाई दे रहा है.यहां तक कि डॉक्टर आपकी मौत का समय भी बोल रहे हों!

मौत आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य बनी हुई है. इंसान के साथ मौत के बाद क्या होता है और आखिरी क्षणों में उसका अनुभव कैसा होता है.इस पर बहुत कुछ कहा जा चुका है. इन विषयों पर कई रिसर्च भी हो चुके हैं, लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने सभी को चौंका दिया. इसमें दावा किया गया है कि इंसान की मौत के बाद भी उसका दिमाग कुछ समय तक एक्टिव रहता है और वह अपने आसपास की आवाजें सुन सकता है.

न्यूयॉर्क में एक डॉक्टर ने ऐसा खुलासा किया है जिसने मौत की परिभाषा को ही बदलकर रख दिया है. दिल की धड़कन रुक जाने के बाद भी इंसानी दिमाग सक्रिय रहता है, और कई बार मरीज डॉक्टरों द्वारा अपनी मौत की घोषणा तक सुन लेते हैं. यह दावा एक भयावह लेकिन महत्वपूर्ण स्टडी में किया गया है, जो Resuscitation में पब्लिश हुई है.

मौत के बाद भी सबकुछ सुनाई देता है

इस स्टडी का नेतृत्व न्यूयॉर्क के एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर (NYU Langone Medical Center) के डॉक्टर सैम पारनिया ने किया. उन्होंने उन मरीजों से बात की जिन्हें क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया गया था-यानी जिनका दिल धड़कना बंद हो चुका था,लेकिन बाद में वे दोबारा जिंदा हो गए. चौंकाने वाली बात यह थी कि कई मरीजों ने अपने कमरे में हो रही घटनाओं को सटीक रूप से याद किया.

डॉ. पारनिया के अनुसार, इन मरीजों की याददाश्त इतनी स्पष्ट इसलिए थी क्योंकि दिल रुकने के बाद भी लगभग एक घंटे तक दिमाग में सामान्य और लगभग सामान्य ब्रेन ऐक्टिविटी पाई गई. उन्होंने बताया कि ये अनुभव न तो सपने जैसे होते हैं और न ही भ्रम या मतिभ्रम.ये एक्सपियरेंस खास होते हैं.

इस शोध में अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीजों की दिमागी गतिविधि और जागरूकता का अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि 40 फीसदी मरीजों ने यादें या सचेत विचार होने की बात कही. डॉ. पारनिया के अनुसार, मौत के दौरान कई लोगों को लगता है कि वे अपने शरीर से अलग हो चुके हैं और कमरे में घूमकर चीजें देख-पहचान रहे हैं.

जैसे कंप्यूटर अचानक रीबूट हो गया

इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) से पता चला कि मरीजों में दिल रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक gamma, delta, theta, alpha और beta जैसी ब्रेन वेव्स मौजूद थीं, जो सोचने और जागरूकता से जुड़ी होती हैं. यह बताता है कि दिमाग दिल रुकने के बाद भी पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि कभी-कभी उच्च स्तरीय गतिविधि दिखाता है-मानो कोई बंद कंप्यूटर अचानक रीबूट हो रहा हो.

पूरी लाइफ का फ्लेशबैक एकसाथ

डॉ. पारनिया का कहना है कि पहले यह माना जाता था कि दिल रुकने के 10 मिनट बाद दिमाग स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है, लेकिन यह शोध दिखाता है कि दिमाग CPR जारी रहने पर देर तक सक्रिय रह सकता है. यही ऊर्जा का उभार लोगों को अपने पूरे जीवन की यादें एक साथ देखने जैसा अनुभव भी दे सकता है.

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