नया इनोवेशन: AIIMS और IIT ने बनाई पोर्टेबल 3D एक्स-रे यूनिट, एआई तकनीक से होगी त्वरित जांच

भोपाल   भारत में सड़क हादसों और ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर इलाज न मिल पाना मौतों का सबसे बड़ा कारण है। विशेषकर सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता के चलते मरीज 'गोल्डन आवर' में दम तोड़ देते हैं। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए AIIMS भोपाल और IIT इंदौर ने हाथ मिलाया है। दोनों संस्थान मिलकर दुनिया की पहली ऐसी एआई-बेस्ड पोर्टेबल 3D एक्स-रे यूनिट विकसित कर रहे हैं, जो अस्पताल पहुंचने से पहले ही सीटी स्कैन जैसी हाई-डेफिनेशन रिपोर्ट दे सकेगी। ICMR ने दी 8 करोड़ की फंडिंग भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने

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Published On :

जनवरी 16, 2026

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भोपाल 
 भारत में सड़क हादसों और ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर इलाज न मिल पाना मौतों का सबसे बड़ा कारण है। विशेषकर सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता के चलते मरीज 'गोल्डन आवर' में दम तोड़ देते हैं। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए AIIMS भोपाल और IIT इंदौर ने हाथ मिलाया है। दोनों संस्थान मिलकर दुनिया की पहली ऐसी एआई-बेस्ड पोर्टेबल 3D एक्स-रे यूनिट विकसित कर रहे हैं, जो अस्पताल पहुंचने से पहले ही सीटी स्कैन जैसी हाई-डेफिनेशन रिपोर्ट दे सकेगी।

ICMR ने दी 8 करोड़ की फंडिंग
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इस क्रांतिकारी प्रोजेक्ट को अपनी मंजूरी दे दी है। देशभर से प्राप्त 1224 रिसर्च प्रस्तावों में से केवल 38 का चयन किया गया, जिनमें मध्य प्रदेश से एकमात्र इसी प्रोजेक्ट को चुना गया है। इसके विकास के लिए ICMR ने 8 करोड़ रुपये की फंडिंग स्वीकृत की है।
कैसे काम करेगी यह तकनीक?

वर्तमान में सीटी स्कैन मशीनें भारी और महंगी होती हैं, जिन्हें एंबुलेंस में नहीं ले जाया जा सकता। इसके उलट नई यूनिट पूरी तरह पोर्टेबल होगी।

कम रेडिएशन: यह मशीन सामान्य सीटी स्कैन की तुलना में 500 गुना कम रेडिएशन उत्सर्जित करेगी।

AI का कमाल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह यूनिट एक्स-रे इमेज को मल्टी-एंगल से कैप्चर कर 3D इमेज में बदल देगी।

तत्काल रिपोर्ट: जांच रिपोर्ट सीधे मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर देखी जा सकेगी, जिससे डॉक्टर मौके पर ही चोट की गंभीरता का मूल्यांकन कर सकेंगे।

तीन चरणों में होगा विकास
प्रोजेक्ट के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. बी.एल. सोनी और डॉ. अंशुल राय ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि इस मशीन को तीन चरणों में तैयार किया जाएगा। पहले चरण में सिर और चेहरे (फेस एंड हेड) की इमेजिंग, दूसरे में फुल-बॉडी स्कैनिंग और तीसरे चरण में कैंसर रेडिएशन मैपिंग के लिए यूनिट तैयार की जाएगी।

बचेगी हजारों की जान
अकेले मध्य प्रदेश में हर साल करीब डेढ़ लाख लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं। यह मशीन एंबुलेंस और आपदा स्थलों पर तैनात की जा सकेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को बिना रेफर किए तत्काल सटीक इलाज मिल सकेगा। सफल परीक्षण के बाद इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारने की योजना है ताकि दुनिया भर में आपातकालीन चिकित्सा को सस्ता और सुलभ बनाया जा सके।

 

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