Netanyahu-Trump Call: फोन पर हुई अहम बातचीत, जल्द अमेरिका में हो सकती है मुलाकात

नेतन्याहू और ट्रंप के बीच हुई फोन पर अहम बातचीत के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें संभावित अमेरिका मुलाकात पर टिकी हैं। आखिर इस बातचीत में क्या फैसला हुआ, किन मुद्दों पर बनी सहमति और दुनिया के लिए इसके क्या मायने हैं, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Netanyahu-Trump Call

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 4, 2026

Netanyahu-Trump Call:  इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने शुक्रवार को आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर विस्तृत बातचीत हुई। यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक भू-राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बातचीत के दौरान, नेतन्याहू ने अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति ट्रंप को हार्दिक बधाई दी।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा, “अमेरिका ही विश्व में स्वतंत्रता और लोकतंत्र का मुख्य आधार है। इजरायल हमारे दोनों देशों के बीच कायम ऐतिहासिक और अटूट संबंधों का सर्वोच्च सम्मान करता है।” इस सकारात्मक बातचीत के दौरान, दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को और अधिक मजबूती देने पर सहमति जताई और जल्द ही अमेरिका में एक आमने-सामने की बैठक करने का निर्णय लिया। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस प्रस्तावित यात्रा या बैठक के लिए किसी विशिष्ट तिथि या स्थान का खुलासा अभी नहीं किया गया है।

लेबनान और ईरान नीति को लेकर ट्रंप की नाराजगी

यह राजनयिक संवाद उस दौर में हुआ है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री नेतन्याहू की कार्यशैली की आलोचना की है। इस असंतोष का मुख्य कारण लेबनान में हिज्बुल्लाह के साथ जारी इजरायली सैन्य संघर्ष है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस निरंतर युद्ध के कारण ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता की संभावनाओं पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हाल ही में ईरान के साथ चल रही ’14-पॉइंट वाले समझौता ज्ञापन’ (MoU) पर जानकारी साझा की है।

उन्होंने बताया कि 1 जुलाई को दोहा में कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। प्रवक्ता के अनुसार, इन चर्चाओं में “सकारात्मक प्रगति” दर्ज की गई है। सभी संबंधित पक्ष आने वाले समय में बातचीत का सिलसिला जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं। अगली उच्च-स्तरीय बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार संपन्न होने के बाद यथाशीघ्र आयोजित की जाएगी।

इजरायल का स्पष्ट रुख: सैन्य अभियान नहीं रुकेगा

दूसरी ओर, इजरायल ने लेबनान को लेकर अपना रुख बेहद सख्त बनाए रखा है। 1 जुलाई को इजरायली अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि लेबनान में लागू कथित युद्धविराम समझौते के बावजूद, हिज्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती। इजरायल की उप-विदेश मंत्री शेर्रेन हैस्केल ने इस मुद्दे पर तर्क देते हुए कहा कि ईरान समर्थित यह सशस्त्र समूह न केवल इजरायल, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति के लिए एक सीधा और गंभीर खतरा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह का पूर्ण निरस्त्रीकरण नहीं होता, तब तक लेबनान में स्थायी स्थिरता की कल्पना करना असंभव है। हैस्केल ने एक साक्षात्कार में कहा कि इजरायल अपनी सीमाओं की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और जब तक हिज्बुल्लाह द्वारा हमले जारी रहेंगे, इजरायली सेना अपने अभियानों को नहीं रोकेगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हिज्बुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से नष्ट करना इजरायल और लेबनान दोनों के व्यापक हितों में है, ताकि भविष्य में शांति का मार्ग प्रशस्त हो सके।

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