Nepal Landslide 2026 : नेपाल में पिछले चार दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने बाढ़ और भूस्खलन के रूप में व्यापक तबाही मचा दी है। देश के कई हिस्सों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पांच लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रही हैं।
भूस्खलन बना मौतों की सबसे बड़ी वजह
NDRRMA के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बारिश से संबंधित घटनाओं में सबसे अधिक लोगों की जान भूस्खलन के कारण गई है। भूस्खलन की अलग-अलग घटनाओं में 14 लोगों की मौत हुई है। वहीं बाढ़ से चार लोगों की जान गई, जबकि लगातार बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में तीन लोगों की मौत दर्ज की गई है। बागलुंग जिले के निशीखोला गांव में सुबह हुए भूस्खलन के दौरान एक मकान ढह गया, जिसमें दबकर चार लोगों की मौत हो गई।

बंगाल की खाड़ी के कम दबाव से रिकॉर्ड बारिश
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से 24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल के कई हिस्सों में अत्यधिक बारिश हुई। नवलपरासी के दुमकुआली में 455.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सबसे अधिक बताई गई है। इसके अलावा पोखरा और तनहुं में भी 400 मिलीमीटर से ज्यादा वर्षा रिकॉर्ड की गई। इतनी भारी बारिश ने पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिए हैं।
247 परिवार प्रभावित, सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त
प्राकृतिक आपदा से देशभर में 247 से अधिक परिवार सीधे प्रभावित हुए हैं। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण करीब 260 मकान पूरी तरह ढह गए, जबकि 80 से ज्यादा घरों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन तथा सुरक्षा बलों को लगातार अभियान चलाना पड़ रहा है।

तीन हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
बिगड़ते हालात को देखते हुए आपातकालीन राहत टीमों ने सशस्त्र पुलिस बल के सहयोग से जोखिम वाले इलाकों में फंसे करीब 3,000 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। जाजरकोट, म्याग्दी और संखुवासभा जैसे दुर्गम पहाड़ी जिलों में राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इन क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की सहायता ली जा रही है।
नारायणी नदी का जलस्तर चेतावनी सीमा से ऊपर
मध्य नेपाल में नारायणी नदी का जलस्तर चेतावनी के निशान 9 मीटर को पार कर गया है। इसके बाद नदी का पानी आसपास की बस्तियों में प्रवेश करने लगा है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। लगातार बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है।
नदियों का बहाव बाधित, अचानक बाढ़ का खतरा
मनांग में भूस्खलन के कारण मर्स्यांग्दी नदी का बहाव आंशिक रूप से बाधित हुआ है। वहीं मुस्तांग में काली गंडकी नदी पर भी भूस्खलन का असर पड़ा है। नदी का प्रवाह बाधित होने से भूस्खलन से बनी झीलों के टूटने और अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात प्रभावित
भूस्खलन के कारण चितवन समेत कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। सड़कों पर मलबा और चट्टानें आने से आवागमन प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर राहत एवं बचाव अभियानों पर भी पड़ रहा है। प्रशासन की टीमें मार्गों को खोलने और प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी सहायता पहुंचाने के प्रयास कर रही हैं।
हिमस्खलन में दो पर्वतारोहियों की मौत
मनांग जिले में 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में भारी बर्फबारी के बाद हिमस्खलन की घटना सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, इस हादसे में दो पर्वतारोहियों के शव बरामद किए गए हैं। खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में राहत अभियान काफी मुश्किल बना हुआ है।
77 जिलों में प्रशासन हाई अलर्ट पर
आपदा की गंभीर स्थिति को देखते हुए नेपाल के सभी 77 जिलों के प्रशासन और प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले नागरिकों को सतर्क रहने और खतरा बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विदेशी पर्यटकों के लिए भी जारी हुई एडवाइजरी
बारिश के दौरान नेपाल में करीब 9,000 विदेशी पर्यटक और ट्रेकर्स मौजूद थे। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेपाल पर्यटन बोर्ड ने अंग्रेजी भाषा में सुरक्षा परामर्श जारी किया है। पर्यटकों को मौसम सामान्य होने तक यात्रा और ट्रेकिंग गतिविधियां रोकने की सलाह दी गई है। लगातार खराब मौसम के बीच प्रशासन का मुख्य फोकस लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने पर है।
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