NEET UG Re-Exam: सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड अर्पित राज समेत 24 गिरफ्तार

नीट यूजी री-एग्जाम के दौरान बिहार में एक बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है। लखीसराय में 7 सॉल्वर और बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारियों समेत 24 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। गया मेडिकल कॉलेज का छात्र अर्पित राज इस धांधली का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। जांच में कई मेडिकल छात्रों की संलिप्तता सामने आई है।

NEET UG Re-Exam

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 22, 2026

NEET UG Re-Exam: नीट यूजी (NEET UG) री-एग्जाम के दौरान बिहार में परीक्षा की शुचिता को तार-तार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। लखीसराय जिले के तीन प्रमुख परीक्षा केंद्रों पर पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में 7 सॉल्वर सहित कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस रैकेट में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करने वाली निजी कंपनी के 14 कर्मचारी भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि असली अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए सॉल्वरों से परीक्षा दिलाने का सौदा 30 लाख रुपये तक में तय किया गया था।

नीट पेपर लीक का पुराना आरोपी अर्पित राज बना फिर मास्टरमाइंड

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड गया मेडिकल कॉलेज का छात्र अर्पित राज है। अर्पित का नाम पहले भी साल 2024 के चर्चित नीट पेपर लीक मामले में उछल चुका है, जिसमें सीबीआई ने उससे विस्तृत पूछताछ की थी। अब एक बार फिर उसका नाम परीक्षा धांधली में आने से जांच का दायरा बढ़ गया है। अर्पित की भूमिका इस पूरे रैकेट के संचालन और परीक्षा केंद्रों तक सॉल्वरों की सेटिंग में संदिग्ध मानी जा रही है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है।

बायोमेट्रिक कर्मचारी बनकर पकड़ा गया मेडिकल छात्र

बताते चले कि, इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब हाजीपुर का रहने वाला और पीएमसीएच (PMCH) का छात्र मयंक कश्यप परीक्षा केंद्र के भीतर संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाया गया। मयंक ने बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी का वेश धारण कर केंद्र में प्रवेश किया था, लेकिन प्रशासन की सतर्कता के कारण वह पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान उसने जो सुराग दिए, उसके आधार पर पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी की और तीन केंद्रों से गिरोह के अन्य सदस्यों व कंपनी के कर्मचारियों को दबोच लिया।

मेडिकल और नर्सिंग छात्रों की संलिप्तता ने मचाया हड़कंप

जांच में सामने आया है कि इस गिरोह में कई मेधावी मेडिकल छात्र शामिल हैं। इसमें बीएचयू की नर्सिंग छात्रा पूनम कुमारी, जो एक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने पहुंची थी, का नाम प्रमुख है। इसके साथ ही रायबरेली एम्स के सौरभ झा, पटना एनएमसीएच के संजीत और उत्तर प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज के छात्र अमन अग्रवाल की गिरफ्तारी ने शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। ये सभी सॉल्वर बनकर असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा में बैठने की तैयारी में थे।

नेटवर्क का दायरा और जांच एजेंसियों की बढ़ती कार्रवाई

पुलिस और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां अब इस विशाल नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इस गिरोह का जाल केवल बिहार तक सीमित न रहकर कई राज्यों तक फैला हो सकता है। फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और बड़े चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग और तेज हो गई है।