नीट छात्रा हत्याकांड: पटना HC ने जांच में हस्तक्षेप से किया इनकार, परिवार को दी कानूनी विकल्प की सलाह

पटना बिहार के चर्चित नीट छात्रा की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को पटना हाईकोर्ट से झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया है। ऐसे में इस मामले में दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता है। पटना हाईकोर्ट में छात्रा के पिता की ओर से न्याय की गुहार लगाते हुए पिछले सप्ताह रिट याचिका दायर की गई थी। जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ में सुनवाई के लिए इसे मंजूर किया गया था। सोमवार को इस

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Published On :

फ़रवरी 2, 2026

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पटना
बिहार के चर्चित नीट छात्रा की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को पटना हाईकोर्ट से झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया है। ऐसे में इस मामले में दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता है।

पटना हाईकोर्ट में छात्रा के पिता की ओर से न्याय की गुहार लगाते हुए पिछले सप्ताह रिट याचिका दायर की गई थी। जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ में सुनवाई के लिए इसे मंजूर किया गया था। सोमवार को इस मामले पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका को निष्पादित कर दिया।

हाईकोर्ट से परिवार को क्या विकल्प?
पटना हाईकोर्ट ने नीट छात्रा के परिवार को विकल्प देते हुए कहा कि अगर वे सीबीआई की जांच से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। मृतका के पिता की ओर से दायर इस याचिका में हॉस्टल संचालक, मकान मालिक, निजी अस्पतालों के डॉक्टर जहां छात्रा भर्ती थी, थानेदार से लेकर पटना एसएसपी और डीजीपी तक को प्रतिवादी बनाया गया था।

क्या है मामला?
बता दें कि पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा पिछले महीने अपने कमरे में बेहोश पाई गई थी। 4 दिन बाद पटना के एक निजी अस्पताल में उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। पुलिस ने पहले इसे सुसाइड बताया, लेकिन परिजन ने रेप के बाद हत्या का आरोप लगाया।

जब छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसमें यौन उत्पीड़न का खुलासा हुआ। इसके बाद हंगामा बढ़ गया। पुलिस ने एसआईटी का गठन कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को विस्तृत अध्ययन के लिए एम्स भेजा गया। हॉस्टल मालिक को गिरफ्तार किया गया।

जांच के दौरान पता चला कि छात्रा नाबालिग थी, तो इस केस में पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की भी बात सामने आई। एसआईटी की ओर से कई लोगों के डीएनए सैंपल लिए गए। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पुलिस मामले का खुलासा जल्द करने का दावा ही कर रही थी कि पिछले सप्ताह इस केस को नीतीश सरकार ने सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि वह सीबीआई को मामला सौंपे जाने से संतुष्ट नहीं हैं। वह हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में एक निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उन्होंने हॉस्टल, पुलिस और अस्पताल के स्टाफ की मिलीभगत का भी आरोप लगाया। फिलहाल केंद्रीय एजेंसी केस की जांच कर रही है।

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