NEET UG 2026 Result: देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी 2026’ के परिणाम घोषित हो चुके हैं। गुरुवार देर रात नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी इन परिणामों ने एक बार फिर शिक्षा की नगरी कोटा की साख को मजबूत किया है। देश भर के टॉप-10 रैंकर्स में कोटा कोचिंग संस्थानों के चार छात्रों ने अपनी जगह बनाकर यह साबित कर दिया है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में कोटा का दबदबा आज भी बरकरार है।
7 लाख सैलरी के बाद भी तनाव में इंजीनियर, एआई से नौकरी जाने का डर
आर्यन और पंशुल का शानदार प्रदर्शन
परीक्षा परिणामों के अनुसार, आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल ने कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच 720 में से 715 अंक हासिल कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। हालांकि, अंकों के समान होने के कारण टाई-ब्रेकर नियमों को लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) और पंशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 (AIR-2) का स्थान मिला। इसके साथ ही, आयुष भालोटिया ने 710 अंकों के साथ AIR-4 और गौरव सिंह ने AIR-9 हासिल कर अपने संस्थानों का नाम रोशन किया। एनटीए के आंकड़ों के मुताबिक, 690 से अधिक अंक लाने वाले 138 छात्रों की सूची ने इस साल परीक्षा के कठिन स्तर को भी दर्शाया है।
सातवीं कक्षा में बुनी गई सफलता की नींव
हरियाणा के फरीदाबाद निवासी AIR-2 पंशुल बंसल की सफलता की कहानी अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है। पंशुल ने अपनी सफलता का श्रेय स्पष्ट लक्ष्य और सही समय पर लिए गए निर्णयों को दिया है। पंशुल के अनुसार, उन्होंने सातवीं कक्षा में ही डॉक्टर बनने का संकल्प ले लिया था। उन्होंने बताया कि 10वीं के बाद उनके पास विषय चुनने के कई विकल्प थे, लेकिन बायोलॉजी के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें विज्ञान की ओर अग्रसर किया। पंशुल का मानना है कि यदि छात्र कम उम्र में ही अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं, तो उनकी सोच और तैयारी उसी दिशा में विकसित होने लगती है, जिससे कांसेप्ट को गहराई से समझना और फाउंडेशन मजबूत करना सरल हो जाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और अभिभावकों का सहयोग
पंशुल की शैक्षणिक यात्रा बेहद प्रभावशाली रही है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान 10वीं और 12वीं की परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक अर्जित किए। इसके अलावा, उन्होंने अपनी मेधा का परिचय देते हुए जेईई मेन 2026 में 99.5 पर्सेंटाइल जैसा उल्लेखनीय स्कोर भी प्राप्त किया। पंशुल की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का एक अहम योगदान रहा है। उनके पिता, जो एक व्यवसायी और पूर्व नेवल इंजीनियर हैं, और उनकी मां, जो एक कंपनी सेक्रेटरी हैं, ने हमेशा पंशुल को स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित किया। पंशुल ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि उनके माता-पिता ने उन पर कभी करियर का अनावश्यक दबाव नहीं बनाया, जिससे उन्हें तनावमुक्त होकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। कोटा के एक प्रमुख कोचिंग संस्थान में दो साल की निरंतर तैयारी ने उनके सपनों को हकीकत में बदलने का काम किया।










