Neal Katyal: कौन है वो वकील जिससे डरते हैं ट्रंप? सुप्रीम कोर्ट में छीनी राष्ट्रपति की शक्ति!

जब पूरी दुनिया डोनाल्ड ट्रंप के 18% टैरिफ से कांप रही थी, तब भारतीय मूल के नील कत्याल ने सुप्रीम कोर्ट में 'संविधान की ढाल' उठाई। 6-3 के ऐतिहासिक फैसले ने ट्रंप की ताकतों को सीमित कर दिया। आखिर कौन हैं नील कत्याल और उन्होंने कैसे रचा यह असंभव लगने वाला इतिहास?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 21, 2026

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Neal Katyal : अमेरिकी न्याय व्यवस्था के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के व्यापारिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी वकील और पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादास्पद टैरिफ प्लान को कानूनी चुनौती देकर एक ऐतिहासिक जीत हासिल की है। ट्रंप ने इमरजेंसी शक्तियों का हवाला देते हुए विभिन्न देशों से आने वाले सामानों पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की थी, जिसे कत्याल ने अदालत में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने कत्याल की दलीलों से सहमत होते हुए इन टैरिफ को ‘असंवैधानिक’ और ‘गैरकानूनी’ करार देकर पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद नील कत्याल न केवल अमेरिका में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून और व्यापार के विशेषज्ञों के बीच सबसे चर्चित चेहरा बन गए हैं।

भारतीय मूल के कत्याल: शिकागो से येल लॉ स्कूल तक का सफर

नील कत्याल की सफलता की कहानी शिकागो से शुरू होती है, जहाँ उनका जन्म भारतीय अप्रवासी माता-पिता के घर हुआ था। उनके पिता एक इंजीनियर और माता एक डॉक्टर थीं, जिन्होंने उन्हें शिक्षा के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया। कत्याल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद डार्टमाउथ कॉलेज और फिर विश्व प्रसिद्ध येल लॉ स्कूल से कानून की डिग्री हासिल की। उनकी कानूनी समझ इतनी गहरी थी कि करियर की शुरुआत में ही उन्हें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क के रूप में काम करने का गौरव प्राप्त हुआ। यहीं से उन्होंने अमेरिकी संविधान की पेचीदगियों और सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली को करीब से समझा, जो आज उनकी जीत का आधार बनी है।

अदालती दलीलें: राष्ट्रपति बनाम संसद की संवैधानिक शक्ति

इस मामले की सुनवाई के दौरान नील कत्याल ने जो दलीलें पेश कीं, वे अमेरिकी लोकतंत्र के ‘शक्तियों के पृथक्करण’ (Separation of Powers) के सिद्धांत पर आधारित थीं। कत्याल ने अदालत को समझाया कि अमेरिकी संविधान के अनुसार, विदेशी व्यापार को विनियमित करने और कर लगाने की वास्तविक शक्ति कांग्रेस (संसद) के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। उन्होंने तर्क दिया कि ट्रंप ने ‘इमरजेंसी एक्ट’ का मनमाना और गलत इस्तेमाल कर वैश्विक व्यापारिक नियमों का उल्लंघन किया है। कत्याल ने साबित किया कि बिना संसद की मंजूरी के इस तरह के व्यापक आर्थिक फैसले लेना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए माना कि राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का उपयोग व्यक्तिगत एजेंडे के लिए नहीं कर सकते।

ओबामा प्रशासन में अहम भूमिका और शैक्षणिक योगदान

नील कत्याल का कद अमेरिकी राजनीति और न्यायपालिका में नया नहीं है। वर्ष 2010 में, तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल के रूप में नियुक्त किया था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने संघीय सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई जटिल और ऐतिहासिक मामलों की पैरवी की। वर्तमान में, वे जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में ‘पॉल सॉन्डर्स प्रोफेसर’ के रूप में अगली पीढ़ी के वकीलों को संवैधानिक कानून पढ़ा रहे हैं। वे संवैधानिक व्याख्या और अपीलीय वकालत के विशेषज्ञ माने जाते हैं, जिनकी राय को वॉशिंगटन के नीति-निर्माता भी गंभीरता से लेते हैं।

करियर की मील का पत्थर उपलब्धियां: 50 से अधिक बार सुप्रीम कोर्ट में पैरवी

नील कत्याल का पेशेवर रिकॉर्ड असाधारण है। उन्होंने अब तक 50 से भी ज्यादा मामलों में अमेरिकी सर्वोच्च अदालत के सामने सफलतापूर्वक बहस की है। उनके करियर के प्रमुख कार्यों में 1965 के ऐतिहासिक ‘वोटिंग राइट्स एक्ट’ की रक्षा करना और 2017 में ट्रंप प्रशासन के ‘ट्रैवल बैन’ (मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध) के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ना शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने मिनेसोटा में हुए बहुचर्चित जॉर्ज फ्लॉयड मर्डर केस में विशेष अभियोजक के रूप में न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में वे ग्लोबल लॉ फर्म ‘मिलबैंक एलएलपी’ (Milbank LLP) में पार्टनर हैं, जहाँ वे संवैधानिक चुनौतियों का सामना करते हैं।

लेखनी और सम्मान: अमेरिकी न्याय जगत का सर्वोच्च सम्मान

कानूनी लड़ाइयों के साथ-साथ कत्याल एक प्रभावशाली लेखक भी हैं। उनकी पुस्तक ‘Impeach: The Case Against Donald Trump’ में उन्होंने ट्रंप के कार्यकाल की कानूनी खामियों का विस्तार से विश्लेषण किया है। उनकी सेवाओं के लिए अमेरिकी न्याय विभाग ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘एडमंड रैंडॉल्फ अवॉर्ड’ से नवाजा है। इतना ही नहीं, ‘फोर्ब्स’ ने उन्हें 2024 और 2025 की सूची में अमेरिका के टॉप 200 वकीलों में शामिल किया है। ‘द अमेरिकन लॉयर’ ने उन्हें दो बार (2017 और 2023) ‘लिटिगेटर ऑफ द ईयर’ के खिताब से सम्मानित किया है।

ट्रंप की नाराजगी और वैश्विक व्यापार पर प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राष्ट्रपति ट्रंप बेहद आक्रोशित बताए जा रहे हैं, क्योंकि यह उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापारिक एजेंडे पर एक बड़ी कानूनी चोट है। कत्याल की यह जीत यह संदेश देती है कि कानून के सामने सत्ता की ताकत भी सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर भारत, चीन और यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के भावी व्यापारिक संबंधों पर पड़ेगा। अब ट्रंप प्रशासन चाहकर भी एकतरफा टैरिफ नहीं थोप पाएगा, जिससे वैश्विक बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है। यह जीत न केवल कत्याल के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक निष्पक्षता के समर्थकों के लिए भी एक बड़ी मिसाल है।

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