Murshidabad Babri Masjid: प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर हो रहे निर्माण को लेकर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि भारत की भूमि पर अब दूसरी ‘बाबरी मस्जिद’ न तो बनेगी और न ही इसे बनने दिया जाएगा। रामभद्राचार्य ने कहा कि जिस ढांचे को इतिहास के पन्नों से हटा दिया गया है, उसका पुनर्जीवन किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लोग पूरी तरह बौखला गए हैं और सत्ता के लालच में भगवान राम को भी भूल चुके हैं।
“बंटोगे तो कटोगे”: हिंदुओं की एकजुटता पर दिया जोर
अपने संबोधन के दौरान रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाले नारे का समर्थन करते हुए समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “हिंदू बंटेगा तो कटेगा, इसलिए हमें एक होना अनिवार्य है। हमारे पंथ और संप्रदाय अनेक हो सकते हैं, लेकिन जब बात धर्म और राष्ट्र की सुरक्षा की आती है, तो हम सबको केवल ‘हिंदू’ के रूप में एक साथ खड़े होना होगा।” उन्होंने सीएम योगी के बयानों पर सहमति जताते हुए दोहराया कि देश की अखंडता के लिए इस तरह के विवादास्पद निर्माणों को रोका जाना चाहिए।
मुर्शिदाबाद में विवादित निर्माण: हुमायूं कबीर का नेतृत्व
इस विवाद की जड़ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में है, जहाँ ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम से एक विशाल ढांचे का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक और जन उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं। निर्माण कार्य की शुरुआत से पहले कबीर ने कुरान का पाठ किया और भारी भीड़ की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों के जरिए नींव खोदने का काम शुरू कराया। यह मामला इसलिए तूल पकड़ रहा है क्योंकि अयोध्या विवाद के निपटारे के बाद किसी भी स्थान पर इसी नाम से मस्जिद बनाना एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद को जन्म दे रहा है।
11 बीघे में भव्य ढांचा: दो साल का लक्ष्य
हुमायूं कबीर के अनुसार, यह मस्जिद लगभग 11 बीघे जमीन पर बनाई जा रही है और इसे पूरा करने में 2 साल का समय लगेगा। कबीर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं अल्लाह का शुक्रिया अदा करता हूं कि आज यह काम शुरू हो सका। लोग मेरा विरोध कर रहे हैं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में बाबरी मस्जिद का ढांचा खड़ा हो जाएगा।” उन्होंने मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जब मुसलमान मस्जिद बनाना चाहते हैं, तो उनका विरोध किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि विरोध करने वालों को वे सत्ता से बाहर कर देंगे।
बयानबाजी और बढ़ता राजनीतिक तनाव
मुर्शिदाबाद में इस निर्माण कार्य के शुरू होने से पूरे देश में सियासत गर्मा गई है। एक ओर जहाँ हुमायूं कबीर इसे धार्मिक स्वतंत्रता और अपनी आस्था का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संत समाज और कई राजनीतिक दल इसे समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश मान रहे हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के हस्तक्षेप के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बाबरी’ नाम का उपयोग करना जानबूझकर दिया गया एक उकसावा हो सकता है, जिससे आने वाले समय में कानूनी और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
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