Mossad Intelligence Iran: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की कथित मौत ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। बताया जा रहा है कि यह घटना उस समय हुई जब वह अपने सुरक्षित महल परिसर में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर रहे थे। इसी दौरान इज़रायल के लड़ाकू विमानों ने अचानक हमला बोल दिया। कुछ ही पलों में खामेनेई का अत्यधिक सुरक्षित ठिकाना मलबे में तब्दील हो गया। इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य और ईरान की शीर्ष नेतृत्व टीम के अन्य अहम लोग भी मारे जाने की खबर है।
अभेद किले को भेदने वाले बंकर बस्टर बम
रिपोर्टों के अनुसार, हमले में 30 से अधिक बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया। इन बमों को विशेष रूप से भूमिगत बंकर और मजबूत किलेबंदी को नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है। जिस परिसर को अभेद किला माना जाता था, वह कुछ ही सेकंड में ध्वस्त हो गया। यह हमला सटीक योजना और उन्नत सैन्य तकनीक का परिणाम बताया जा रहा है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
मोसाद की वर्षों पुरानी जासूसी का नतीजा
हमले के पीछे मोसाद की भूमिका को अहम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही गुप्त निगरानी और खुफिया ऑपरेशन का परिणाम थी। कथित संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में इजरायली और सहयोगी एजेंसियों ने मिलकर काम किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि वर्षों की रणनीतिक तैयारी और सूचनाओं के विश्लेषण के बाद यह कदम उठाया गया।
ईरान के शीर्ष नेतृत्व में अंदर तक घुसपैठ
सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, मोसाद ने ईरान की उच्च सुरक्षा व्यवस्था में गहरी पैठ बना ली थी। दावा किया जा रहा है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और खामेनेई के करीबी सर्कल में भी उसके संपर्क मौजूद थे। इन्हीं सूत्रों के माध्यम से बैठक के समय और स्थान की जानकारी प्राप्त हुई। यह भी कहा जा रहा है कि खुफिया एजेंसी ने कई स्तरों पर सूचनाओं का मिलान कर हमले की सटीक योजना तैयार की।
फोन हैकिंग और मूवमेंट ट्रैकिंग की आशंका
कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि खामेनेई के अंगरक्षकों के मोबाइल फोन हैक किए गए थे। उनके लोकेशन डेटा और संचार गतिविधियों को ट्रैक कर बैठक की जानकारी जुटाई गई। इससे पहले भी विभिन्न अभियानों में इसी तरह डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए शीर्ष नेताओं की बैठकों का पता लगाया गया था। आधुनिक साइबर तकनीकों ने जासूसी के तरीकों को और अधिक प्रभावी बना दिया है।
सैटेलाइट, सिग्नल इंटेलिजेंस और एआई का इस्तेमाल
बताया जा रहा है कि हमले से पहले खामेनेई, उनके सलाहकारों और IRGC कमांडरों की अलग-अलग उच्च स्तरीय बैठकों की सूचना मिली थी। सटीक लोकेशन की पुष्टि के लिए सैटेलाइट इमेजरी, सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) और अत्याधुनिक साइबर टूल्स का सहारा लिया गया। सूत्रों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित विश्लेषण से इनपुट्स को मिलाकर अंतिम लक्ष्य तय किया गया।
सुबह 9 बजे किया गया सटीक हमला
खुफिया जानकारी के आधार पर इजरायल ने स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे हमला किया, जब बैठक चल रही थी। दिन के उजाले में की गई इस कार्रवाई ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया। इस घटना के बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी हुई हैं।










