
Moradabad News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों से पहले कुछ पोस्टर लगाए जाने का मामला सामने आया है। इन पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में ‘लव जिहाद से सावधान’ लिखा है। पोस्टर सिविल लाइंस इलाके के हाई स्ट्रीट मार्केट और वेव सिनेमा मॉल के आसपास दीवारों पर दिखाई दिए। पोस्टरों के सामने आने के बाद इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
‘लव जिहाद से सावधान’ पोस्टर में हिंदू महिलाओं से क्या अपील की गई?

बताते चले कि, पोस्टरों में हिंदू महिलाओं और युवतियों से गरबा और डांडिया कार्यक्रमों के दौरान सतर्क रहने की अपील की गई है। इनमें दावा किया गया है कि कुछ गैर-हिंदू लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा पंडालों में प्रवेश कर सकते हैं। पोस्टर लगाने वालों ने महिलाओं से ऐसे लोगों से सावधान रहने को कहा है। हालांकि, पोस्टरों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
गरबा पंडालों में प्रवेश को लेकर भी उठाई गई मांग
पोस्टरों में गरबा कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की अपील भी की गई है। इनमें महिला और मुस्लिम युवक की तस्वीर के साथ चेतावनी लिखी गई है। पोस्टर पर इस्तेमाल किए गए शब्दों में लोगों को पहचान छिपाकर पंडालों में आने वाले कथित लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि इन पोस्टरों को किस संगठन या व्यक्ति ने लगाया है।
मुरादाबाद पुलिस CCTV फुटेज से पोस्टर लगाने वालों की पहचान में जुटी
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने पोस्टर लगाने वालों की पहचान करने के लिए जांच शुरू कर दी है। इसके लिए आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पोस्टर किसने लगाए और इन्हें लगाने के पीछे क्या मकसद था। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नवरात्रि के बीच सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने पर पुलिस का जोर
नवरात्रि के दौरान मुरादाबाद में गरबा और डांडिया जैसे कार्यक्रमों को लेकर लगाए गए इन पोस्टरों ने सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द से जुड़ी चर्चा को तेज कर दिया है। खासकर व्यस्त बाजारों और पॉश इलाकों में पोस्टर दिखाई देने के बाद लोग इस मामले पर चर्चा कर रहे हैं।

पुलिस की प्राथमिकता त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह के तनाव को रोकना है। पोस्टर लगाने वाले संगठन की पहचान अभी सामने नहीं आई है। साथ ही, पोस्टरों में किए गए दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन पोस्टरों के पीछे कौन है और उन्हें लगाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था।











