Mohammed Shami Case : घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल (IPL) के मंच तक, भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने हर जगह लगातार अपनी धारदार गेंदबाजी से खुद को साबित किया है। इसके बावजूद, अजीत अगरकर की अगुवाई वाली बीसीसीआई की सीनियर सिलेक्शन कमिटी ने इस अनुभवी पेसर को आगामी अफगानिस्तान सीरीज के लिए टेस्ट और वनडे (ODI) दोनों ही टीमों में जगह नहीं दी है। हालांकि, खेल के मैदान पर चयनकर्ताओं द्वारा नजरअंदाज किए जाने के इस दौर में, मैदान के बाहर एक बेहद संवेदनशील और लंबे समय से चल रहे कानूनी मामले में शमी को आखिरकार एक बड़ी राहत मिल गई है।
मोहम्मद शमी को उनकी पत्नी हसीन जहां द्वारा दर्ज कराए गए चेक बाउंस के एक आपराधिक मामले में अदालत ने पूरी तरह बरी कर दिया है। बुधवार को कोलकाता की अलीपुर चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने चार साल से खिंच रहे इस मुकदमे पर अपना अंतिम फैसला सुनाया। माननीय अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि शमी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सच साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत और जानकारी मौजूद नहीं है।
क्या था 2018 का पूरा विवाद?
इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ें साल 2018 से जुड़ी हुई हैं, जब मोहम्मद शमी और उनकी पत्नी हसीन जहां के बीच पारिवारिक विवाद सार्वजनिक हो गया था। हसीन जहां ने उस वक्त शमी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया था कि क्रिकेटर ने उन्हें घरेलू और पारिवारिक खर्चों को पूरा करने के लिए 1 लाख रुपये का एक बैंक चेक दिया था। हसीन के मुताबिक, जब उन्होंने उस चेक को अपने बैंक खाते में जमा किया, तो वह अपर्याप्त राशि या अन्य तकनीकी कारणों से बाउंस हो गया।
इसी वाकये को आधार बनाकर उन्होंने शमी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। चेक बाउंस के इस मुकदमे के साथ ही हसीन जहां ने शमी और उनके परिवार के अन्य सदस्यों पर घरेलू हिंसा, प्रताड़ना और मैच फिक्सिंग जैसे कई और बेहद संगीन आरोप भी लगाए थे, जिसने उस वक्त भारतीय क्रिकेट जगत में भारी सनसनी मचा दी थी।
‘मैने कुछ गलत नहीं किया’
बुधवार को मुकदमे की अंतिम सुनवाई के दौरान मोहम्मद शमी व्यक्तिगत रूप से अलीपुर कोर्ट में पेश हुए। जैसे ही कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बाइज्जत बरी करने का फैसला सुनाया, वैसे ही शमी और उनके वकीलों के चेहरे खिल उठे। अदालत परिसर से बाहर आने के बाद, लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के इस स्टार पेसर ने मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा, “मुझे पहले से ही पूरा भरोसा था कि न्याय हमारे पक्ष में ही होगा, क्योंकि मैंने कभी कुछ भी गलत नहीं किया है।
मुझसे कानूनी तौर पर जो भी पैसा मांगा गया, मैंने हमेशा समय पर दिया। जीवन में सब कुछ इंसान के अपने नियंत्रण में नहीं होता है। फिर भी, परिस्थितियां चाहे मैदान पर हों या मैदान के बाहर, मैं हमेशा अपनी पूरी क्षमता से सब कुछ मैनेज करने की कोशिश करता हूं।”
गुजारा भत्ते की कानूनी लड़ाई अभी भी जारी
भले ही चेक बाउंस के मामले में मोहम्मद शमी को एक बड़ी जीत मिल गई हो, लेकिन उनके और हसीन जहां के बीच तलाक और एलिमनी (गुजारा भत्ता) को लेकर मुख्य कानूनी लड़ाई अभी भी पूरी तरह जारी है। कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा आदेश के मुताबिक, शमी अपनी पत्नी हसीन जहां को हर महीने 1.5 लाख रुपये का व्यक्तिगत गुजारा भत्ता देते हैं, और इसके साथ ही अपनी इकलौती बेटी की अच्छी परवरिश व देखभाल के लिए हर महीने 2.5 लाख रुपये अलग से देते हैं। यानी शमी हर महीने कुल 4 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि एलिमनी के तौर पर दे रहे हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हसीन जहां अभी भी कोलकाता में स्थित शमी के आलीशान घर में ही निवास कर रही हैं।
अमरोहा और दिल्ली के बीच शमी का सफर
मोहम्मद शमी अपनी बेटी से बेहद प्यार करते हैं और उसकी पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए वे लगातार दिल्ली और कोलकाता के बीच नियमित रूप से यात्रा करते रहते हैं। जब वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट या आईपीएल के दौरों में व्यस्त नहीं होते हैं, तो शमी अपना ज्यादातर समय उत्तर प्रदेश के अमरोहा स्थित अपने पैतृक फार्महाउस पर ऑर्गेनिक खेती और गेंदबाजी के अभ्यास में बिताते हैं। एलिमनी और पारिवारिक अलगाव को लेकर चल रहे इस लंबे मानसिक तनाव के बीच, बुधवार को चेक बाउंस केस में आया यह अदालती फैसला बंगाल के इस जांबाज पेसर के लिए किसी बड़ी मानसिक राहत से कम नहीं है, जिससे वे अब अपने क्रिकेट करियर पर दोबारा बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।










