International Yoga Day 2026 :12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया को स्वास्थ्य का एक नया मूलमंत्र दिया। प्रधानमंत्री ने योग की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि नियमित योग के माध्यम से कोई भी व्यक्ति 70 वर्ष की आयु में भी 50 वर्ष जैसी शारीरिक ऊर्जा और युवापन का अनुभव कर सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग को आपस में जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। योग की प्रकृति समावेशी है, जो सबको साथ लेकर चलती है और बिना किसी भेदभाव के पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
‘रेड रोड’ बना मुख्य आयोजन का गवाह
इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य और सबसे भव्य कार्यक्रम पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक ‘रेड रोड’ पर आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक स्थल पर एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं उपस्थित होकर योगाभ्यास किया। इस मेगा इवेंट में पीएम मोदी के साथ लगभग 35 हजार उत्साही लोगों ने एक साथ विभिन्न योग मुद्राओं का अभ्यास किया। कोलकाता का यह विशाल आयोजन न केवल देश के कोने-कोने में योग के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि योग किस तरह राष्ट्रीय एकता और सामूहिक चेतना का प्रतीक बन चुका है।
गीता के उपदेशों का संदर्भ
योगाभ्यास सत्र की शुरुआत करने से पहले प्रधानमंत्री ने वहाँ उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। अपने भाषण में पीएम मोदी ने भगवान श्रीकृष्ण के गीता उपदेशों का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा, ‘साथियों, हमारे शास्त्रों में और स्वयं भगवान कृष्ण ने योग को लेकर बहुत स्पष्ट कहा है कि संतुलित आहार और विहार (दिनचर्या) से, संतुलित क्रिया और कर्मों से, तथा संतुलित नींद और जागरण से योग आपके जीवन के समस्त दुखों का नाश करने वाला माध्यम बन जाता है।’ प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब हमारा जीवन हर मोर्चे पर संतुलित होता है, तभी योग का वास्तविक लाभ हमें प्राप्त होता है।
थीम “Yoga for Healthy Ageing”
इस वर्ष 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की आधिकारिक थीम “Yoga for Healthy Ageing” यानी ‘स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग’ रखी गई है। इस विशेष थीम को चुनने के पीछे का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के लोगों को यह संदेश देना है कि योग सिर्फ युवाओं या शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है। यह बढ़ती उम्र के साथ शरीर को लचीला, मन को शांत और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाए रखने का एक समग्र और वैज्ञानिक तरीका है। वृद्धावस्था में भी आत्मबल और शारीरिक सक्रियता बनाए रखने के लिए योग को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
आधुनिक जीवन का असंतुलन और योग
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग जीवन के असंतुलन से जूझ रहे हैं और उन्हें मानसिक व शारीरिक शांति के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। योग हमें इसी असंतुलित जीवन में संतुलन के साथ जीने की अद्भुत कला सिखाता है। जब हम अपने शरीर और मन को सही तरीके से संचालित करना सीख लेते हैं, तो अच्छी सेहत हमारा स्वभाव बन जाती है। योग सिर्फ शारीरिक तंदुरुस्ती नहीं, बल्कि मानसिक स्पष्टता और सही-गलत का बोध भी कराता है। यह अब केवल एक पर्सनल लाइफस्टाइल का हिस्सा नहीं, बल्कि हर इंसान की बुनियादी जरूरत बन चुका है। उन्होंने आह्वान किया कि योग को सिर्फ एक दिन के उत्सव तक सीमित न रखकर रोजमर्रा की आदत बनाएं।
बंगाल की पावन भूमि पर आध्यात्मिक अनुभव
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि इस बार उन्हें योग दिवस के मौके पर बंगाल में रहने का अवसर मिला। उन्होंने बंगाल की पवित्र और ऐतिहासिक भूमि को नमन करते हुए कहा कि यह वही धरती है जहाँ स्वामी विवेकानंद जैसे मनीषियों ने जन्म लिया और पूरी दुनिया को भारतीय योग दर्शन से परिचित कराया। इसी तरह, लाहिड़ी महाशय जैसे महान योगियों ने योग की इस समृद्ध परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने का काम किया। आज ऐसी आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत धरती पर हजारों लोगों के साथ सामूहिक योगाभ्यास करना अपने आप में एक अलग और अलौकिक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
विश्व कल्याण की भावना
भाषण के समापन की ओर बढ़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 21 जून का यह दिन भौगोलिक रूप से वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कारण अब यह विश्व का सबसे बड़ा सामूहिक उत्सव भी बन चुका है। आज दुनिया के हर कोने से योग की बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीरें सामने आ रही हैं। उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में हिंद महासागर तक, और पूर्व में पूर्वोत्तर व बंगाल से लेकर पश्चिम में सौराष्ट्र तक, पूरा भारतवर्ष और संपूर्ण विश्व योग की दिव्य ऊर्जा से चैतन्य नजर आ रहा है। योग ने पूरी मानवता को एक सूत्र में पिरो दिया है, और यही इसकी वास्तविक शक्ति है।
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