MLA Vijay Singh Gond Death: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से एक बेहद दुखद समाचार सामने आया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दुद्धी विधानसभा सीट से विधायक विजय सिंह गोंड का निधन हो गया है। लखनऊ स्थित संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि समाजवादी पार्टी के नेता अवधनारायण यादव ने की है। इस खबर के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई।
लंबे समय से बीमार थे, किडनी फेल होने से बढ़ी परेशानी
विजय सिंह गोंड पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बताया गया कि उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो चुकी थीं, जिसके चलते उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और अंततः 71 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके परिवार और समर्थकों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति मानी जा रही है।
शुक्रवार को होगा अंतिम संस्कार
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, विजय सिंह गोंड का अंतिम संस्कार शुक्रवार को उनके पैतृक क्षेत्र में किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समर्थकों, पार्टी नेताओं और स्थानीय लोगों के पहुंचने की संभावना है। सोनभद्र और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल है और लोग अपने लोकप्रिय नेता को श्रद्धांजलि देने की तैयारी कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने जताया गहरा शोक
विजय सिंह गोंड के निधन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया है। निधन की खबर मिलते ही अखिलेश यादव लखनऊ स्थित पीजीआई पहुंचे और परिवार से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि विनय सिंह गोंड हमारे बीच नहीं रहे, यह पार्टी और प्रदेश की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने हमेशा आदिवासी समाज की निस्वार्थ सेवा की और जनता ने उन्हें बार-बार अपना प्रतिनिधि चुनकर सम्मान दिया।
आदिवासी समाज की मजबूत आवाज थे विजय सिंह गोंड
विजय सिंह गोंड को आदिवासी समाज की आवाज बुलंद करने वाले अग्रणी नेताओं में गिना जाता था। उन्होंने अपना पूरा राजनीतिक जीवन जनजातीय समुदाय के अधिकारों, सम्मान और विकास के लिए समर्पित कर दिया। सोनभद्र जैसे पिछड़े और आदिवासी बहुल क्षेत्र में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों को लगातार उठाया। यही वजह है कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के मार्गदर्शक माने जाते थे।
दुद्धी सीट पर ‘पितामह’ के रूप में थी पहचान
दुद्धी विधानसभा सीट को उत्तर प्रदेश की आदिवासी राजनीति का मजबूत गढ़ माना जाता है। यह प्रदेश की 403वीं और अंतिम विधानसभा सीट है, जो जनजाति के लिए आरक्षित है। इस सीट पर विजय सिंह गोंड का लंबे समय तक वर्चस्व रहा। उनके राजनीतिक अनुभव और प्रभाव को देखते हुए उन्हें दुद्धी क्षेत्र में ‘पितामह’ की संज्ञा दी जाती थी। स्थानीय राजनीति में उनका नाम एक संस्थान की तरह लिया जाता था।
आठ बार विधायक बनकर रचा राजनीतिक इतिहास
विजय सिंह गोंड कुल आठ बार विधायक चुने गए, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ते हुए सात बार लगातार जीत दर्ज की। आरक्षण संबंधी कारणों से वे दो बार स्वयं चुनाव नहीं लड़ सके, लेकिन उनके समर्थन से खड़े किए गए प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। यह उनके जनाधार और प्रभाव का स्पष्ट प्रमाण था।
चुनावी उतार-चढ़ाव के बावजूद कायम रहा प्रभाव
हालांकि वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में उन्हें मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इससे उनके कद में कोई कमी नहीं आई। वर्ष 2024 में हुए उपचुनाव में उन्होंने एक बार फिर शानदार वापसी करते हुए विधायक की कुर्सी हासिल की। यह जीत दर्शाती है कि जनता के बीच उनका भरोसा और लोकप्रियता अंतिम समय तक बनी रही।
राजनीतिक विरासत छोड़ गए विजय सिंह गोंड
विजय सिंह गोंड का निधन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि यह आदिवासी राजनीति के एक पूरे युग का अंत माना जा रहा है। उन्होंने अपने पीछे संघर्ष, सेवा और नेतृत्व की एक मजबूत विरासत छोड़ी है। उनके जाने से दुद्धी और सोनभद्र की राजनीति में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा। समर्थकों और पार्टी नेताओं के लिए वे हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे।










