मिड-डे मील में बदलाव, बारिश के मौसम में इन सब्जियों से परहेज

पटना मानसून के चलते बिहार में बारिश का दौर शुरू हो गया है। आज गुरुवार को भी मौसम विभाग ने सूबे के 30 जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। इधर बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालयों ने बनने वाले मिड-डे मील को लेकर नई गाइड लाइन जारी कर दी है। अब सरकारी स्कूलों के मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में बरसात के महीने में बैंगन भिंडी और साग नहीं बनेगा। मिड डे मील में बैंगन, भिंडी, पत्ता गोभी और सभी प्रकार के साग पर रोक सरकारी स्कूलों में पढ़ने

Wrriten By :

Editor

Published On :

जुलाई 9, 2026

पटना
मानसून के चलते बिहार में बारिश का दौर शुरू हो गया है। आज गुरुवार को भी मौसम विभाग ने सूबे के 30 जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। इधर बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालयों ने बनने वाले मिड-डे मील को लेकर नई गाइड लाइन जारी कर दी है। अब सरकारी स्कूलों के मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में बरसात के महीने में बैंगन भिंडी और साग नहीं बनेगा।
मिड डे मील में बैंगन, भिंडी, पत्ता गोभी और सभी प्रकार के साग पर रोक
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन (एमडीएम) उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग ने ये नई गाइडलाइन जारी की है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि मिड डे मील में बैंगन, भिंडी, पत्ता गोभी और सभी प्रकार के साग के उपयोग न करें। इन सब्जियों की जगह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ताजी, स्वच्छ और सुरक्षित मौसमी सब्जियों का उपयोग किया जाए, ताकि बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।

सभी जिलों के अधिकारियों को भेजे गए पत्र
मध्याह्न भोजन योजना निदेशक विनायक मिश्र ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (डीपीओ) को भेजे पत्र में कहा है कि बरसात के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने भोजन तैयार करने में साफ-सफाई, ताजी सामग्री के उपयोग और खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

बरसात में बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए लिया गया फैसला
विभाग का मानना है कि मानसून में बारिश के दौरान कुछ हरी सब्जियों और पत्तेदार साग में संक्रमण की आशंका अधिक रहती है। इसके सेवन से बच्चों में संक्रमण और फूड प्वाइजनिंग का खतरा बना रहता है। ऐसे में यह फैसला बच्चों को खाद्य जनित बीमारियों से बचाने और विद्यालयों में सुरक्षित मध्याह्न भोजन सुनिश्चित करने को लिया गया है।