Soumya Asthana: थाने में वीडियो बनाने पर मुकदमा! CO सौम्या अस्थाना का ऑडियो वायरल, मचा बवाल

मेरठ की ब्रह्मपुरी CO सौम्या अस्थाना का एक विवादित ऑडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया है, जिसमें उन्होंने थाने में वीडियोग्राफी करने वाले पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है। इस मामले पर SSP अविनाश पांडेय ने सफाई दी है, वहीं कानूनी विशेषज्ञों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता और नियमों का उल्लंघन बताया है।

Soumya Asthana

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 3, 2026

Soumya Asthana: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस प्रशासन और मीडिया के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। ब्रह्मपुरी की क्षेत्राधिकारी (सीओ) सौम्या अस्थाना का एक विवादित ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और कानूनी सीमाओं पर भी बहस छेड़ दी है।

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सीओ सौम्या अस्थाना का वायरल ऑडियो

बताते चले कि, विवाद की जड़ में सर्किल ऑफिसर सौम्या अस्थाना का 29 सेकंड का एक ऑडियो संदेश है। इस क्लिप में वह अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश देती सुनी जा सकती हैं कि यदि कोई पत्रकार थाने के परिसर के भीतर वीडियोग्राफी करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया जाए। जैसे ही यह निर्देश सार्वजनिक हुआ, पुलिस विभाग में खलबली मच गई और स्थानीय मीडिया जगत में भारी रोष व्याप्त हो गया।

एसएसपी अविनाश पांडेय का स्पष्टीकरण और बचाव

आपको बता दे कि, मामले को तूल पकड़ता देख मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अविनाश पांडेय को मोर्चा संभालना पड़ा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सीओ के निर्देशों का गलत अर्थ निकाला गया है। एसएसपी के अनुसार, यह आदेश पेशेवर पत्रकारों के लिए नहीं, बल्कि उन ‘अनधिकृत पोर्टल’ चलाने वालों के लिए था जो थाने के कामकाज में बाधा डालते हैं और अनावश्यक वीडियो रिकॉर्डिंग करते हैं। उन्होंने साफ किया कि मुख्यधारा के मीडियाकर्मियों पर थाने में वीडियो बनाने को लेकर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और कानूनी विशेषज्ञों का मत

कानूनी जानकारों ने सीओ के इस आदेश को कानून की कसौटी पर कमजोर बताया है। विशेषज्ञों का तर्क है कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 2(8) के तहत पुलिस स्टेशन को ‘निषिद्ध स्थान’ (Prohibited Place) की श्रेणी में नहीं रखा गया है। विभिन्न अदालती फैसलों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक सेवा के स्थानों पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए की गई रिकॉर्डिंग को अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह सुरक्षा या जांच में बाधा न डाले।

कौन हैं पीपीएस अधिकारी सौम्या अस्थाना?

विवादों के केंद्र में रहीं सौम्या अस्थाना यूपी पुलिस सेवा की 2022 बैच की अधिकारी हैं। वह यूपीपीएससी परीक्षा 2022 की टॉपर रह चुकी हैं और प्रयागराज की मूल निवासी हैं। 21 अगस्त 2023 को पुलिस सेवा में शामिल होने के बाद, उनकी नियुक्ति 14 फरवरी 2025 को मेरठ के ब्रह्मपुरी सर्किल में हुई थी। एक मेधावी पृष्ठभूमि होने के बावजूद, वीडियोग्राफी को लेकर दिए गए उनके हालिया बयान ने उन्हें एक बड़ी प्रशासनिक मुश्किल में डाल दिया है।

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