Meerut Kapsad Case: मेरठ अपहरण कांड, मां की हत्या पर गरमाई सियासत, पुलिस से भिड़े चन्द्रशेखर आजाद

मेरठ में खूनी तांडव के बाद सियासी संग्राम: क्या पुलिस के घेरे को तोड़ पाएंगे चंद्रशेखर आजाद? मेरठ के कपसाड़ में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण ने यूपी की राजनीति में उबाल ला दिया है। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को गाजीपुर बॉर्डर और सिवाया टोल पर पुलिस ने रोका, जिसके बाद भारी हंगामा हुआ। क्या प्रशासन की पाबंदियों के बीच पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या यह मामला नया राजनीतिक मोड़ लेगा?

Meerut Kapsad Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 10, 2026

Meerut Kapsad Case:  मेरठ के कपसाद गांव में मां की हत्या और बेटी के अपहरण की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस गंभीर मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी तेजी से गर्मा गया है। समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के शीर्ष नेता पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ पहुंचे, जहां पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। टोल प्लाजा पर पुलिस और नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली, वहीं कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर विरोध जताया।

चन्द्रशेखर आजाद को पुलिस ने रोका, सड़क पर दौड़ते आए नजर

आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चन्द्रशेखर आजाद जब मेरठ जा रहे थे, तो पुलिस ने उन्हें टोल प्लाजा पर रोक दिया। इस दौरान भारी गहमागहमी देखने को मिली। हालात ऐसे बने कि चन्द्रशेखर आजाद सड़क पर दौड़ते हुए और बाद में बाइक से टोल प्लाजा तक पहुंचते नजर आए। इस दृश्य ने पूरे मामले को और अधिक सुर्खियों में ला दिया।

“50 घंटे बीत गए, बेटी का कोई सुराग नहीं” – चन्द्रशेखर आजाद

इंडिया टीवी से बातचीत में चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि इस मामले में बेहद गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने कहा, “मेरी मां की हत्या कर दी गई और बेटी को अगवा कर लिया गया। 50 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक बेटी का कोई पता नहीं चला।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर पीड़िता की छवि खराब करने की साजिश कर रहे हैं, जो बेहद निंदनीय है।

कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस पर उठाए सवाल

चन्द्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस नीति की बात करती है, लेकिन हकीकत यह है कि बेटी को बचाने की कोशिश में मां की जान चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी लंबे समय से लड़की को परेशान कर रहे थे और उसे जबरन उठाने के लिए मां को रास्ते से हटाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता की शादी कहीं और तय हो चुकी थी, फिर भी आरोपी उसे लगातार परेशान कर रहा था।

सपा सांसद रामजीलाल सुमन की पुलिस से तीखी बहस

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद रामजीलाल सुमन भी पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ पहुंचे। हालांकि, काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान पुलिस और सपा नेताओं के बीच जमकर बहस हुई। सरधना से विधायक अतुल प्रधान भी मौके पर मौजूद थे। स्थिति को देखते हुए गांव के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने।

क्या है पूरा मामला: मां की हत्या, बेटी का अपहरण

गुरुवार को मेरठ के कपसाद गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 50 वर्षीय दलित महिला ने अपनी 20 साल की बेटी को अपहरणकर्ताओं से बचाने की कोशिश की, इसी दौरान आरोपियों ने उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। हमले के बाद आरोपी बेटी को जबरन अपने साथ ले गए।

पुलिस जांच और आरोपियों की पहचान

पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों की पहचान पारस सोम (23) और सुनील कुमार (25) के रूप में की है, जो उसी गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रशासन इस मामले में ढिलाई बरत रहा है और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है।

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