Meerut: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से जुड़े बहुचर्चित और सनसनीखेज ‘सौरभ राजपूत हत्याकांड’ में अब इंसाफ की घड़ी बेहद नजदीक आ गई है। इस बहुचर्चित और रूह कंपा देने वाले मामले में न्याय की प्रक्रिया अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। जिला जज मेरठ अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में इस मामले की लंबी कानूनी बहस पूरी हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष और वादी पक्ष के वकीलों ने अदालत के समक्ष अपनी-अपनी दलीलें और साक्ष्य मजबूती से रख दिए हैं। दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों के बयान सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाने के लिए 30 सितंबर यानी कल की तारीख मुकर्रर की है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
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क्या है पूरा मामला? प्रेम प्रसंग और लंदन से वापसी की खौफनाक दास्तान

यह वीभत्स मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र का है। पुलिस और अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में पेश किए गए विवरण के अनुसार, मुस्कान रस्तोगी ने साल 2016 में इंदिरानगर के रहने वाले सौरभ राजपूत के साथ प्रेम विवाह किया था। साल 2020 में दोनों की एक बेटी भी हुई। इस सुखी वैवाहिक जीवन के बीच मुस्कान की मुलाकात उसके पुराने सहपाठी साहिल से हुई, जो धीरे-धीरे नजदीकियों में बदल गया। जब इस अवैध संबंधों की भनक सौरभ को लगी, तो घर में कलह और विवाद शुरू हो गया।
इस तनाव के बीच सौरभ मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर लंदन से वापस अपने घर लौटा था। आरोप है कि वापस लौटने के बाद उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने मिलकर सौरभ की बेरहमी से हत्या कर दी। क्रूरता की हदें पार करते हुए उन्होंने शव के कई टुकड़े किए और उन्हें एक नीले ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट से सील कर दिया ताकि किसी को शक न हो। पति के भरोसे को कलंकित करने वाली इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था।
क्या साबित कर पाए सबूत?

इस संगीन मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC) क्रिमिनल केके चौबे और वादी पक्ष के अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने अदालत में मजबूत पैरवी की। अभियोजन पक्ष का कहना है कि उन्होंने अदालत में वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट्स और कुल 22 गवाहों के बयानों की एक अटूट कड़ी को सिलसिलेवार तरीके से पेश किया है। वकीलों ने पूरी उम्मीद जताई है कि सौरभ राजपूत की हत्या करने वाली आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को अदालत से फांसी या उम्रकैद जैसी कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।
दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलों में मुख्य रूप से यह तर्क दिया है कि इस मामले में कोई भी प्रत्यक्ष (चश्मदीद) गवाह मौजूद नहीं है। बचाव पक्ष ने दावा किया है कि आरोपियों को आपसी संपत्ति विवाद या रंजिश के तहत झूठा फंसाया गया है, इसलिए उन्हें राहत मिलनी चाहिए। हालांकि, दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा अपनी अंतिम बहस पूरी किए जाने के बाद अब सभी की नजरें कल आने वाले अदालत के फैसले पर टिकी हैं।
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