Mayawati on UGC SC Stay: मायावती की सवर्णों को लेकर बड़ी सलाह, बोलीं- ‘जांच कमेटी में उन्हें भी रखते तो नहीं होता UGC पर बवाल’

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद मायावती ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इन नियमों को लागू करने से पहले सवर्ण समाज को विश्वास में लेती और कमेटियों में उन्हें प्रतिनिधित्व देती, तो देश में सामाजिक तनाव पैदा नहीं होता। क्या मायावती का यह रुख आगामी चुनावों के लिए नई रणनीति है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 29, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

Mayawati on UGC SC Stay: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकने के लिए जारी किए गए नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि इन नियमों को दोबारा ड्राफ्ट किया जाए। जब तक संशोधित नियम तैयार नहीं होते, तब तक मौजूदा नियम लागू नहीं होंगे। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

मायावती की प्रतिक्रिया: फैसला उचित

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए अदालत का यह निर्णय सही है। मायावती के अनुसार, UGC के नए नियमों के कारण देश में सामाजिक तनाव का माहौल बन गया था, जिसे रोकना जरूरी था।

सोशल मीडिया पर मायावती का बयान

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि UGC द्वारा सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए बनाए गए नए नियमों से समाज में तनाव पैदा हो गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का इन नियमों पर रोक लगाने का फैसला उचित है, ताकि देश में सामाजिक सौहार्द बना रहे।

सवर्ण समाज को लेकर मायावती की खास मांग

अपने बयान में मायावती ने सवर्ण समाज के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि UGC इन नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में ले लेता, तो विवाद की स्थिति पैदा नहीं होती। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि जांच समितियों और अन्य व्यवस्थाओं में अपरकास्ट यानी सवर्ण समाज को भी प्राकृतिक न्याय (नेचुरल जस्टिस) के सिद्धांत के तहत उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।

क्या है पूरा विवाद

दरअसल, UGC ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नए नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों को चुनौती देते हुए कुछ याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उनका तर्क था कि नियमों में केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के खिलाफ भेदभाव का ही उल्लेख है, जबकि सामान्य वर्ग को भेदभाव का शिकार मानने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: क्या हम पीछे जा रहे हैं

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि आजादी के 75 वर्षों में देश ने जातिरहित समाज की दिशा में काफी प्रगति की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब हम फिर से पीछे की ओर जा रहे हैं। इस टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया और 13 जनवरी को लागू किए गए नियमों पर रोक लगा दी।

आगे की राह पर नजर

अब केंद्र सरकार और UGC को नए सिरे से नियमों का मसौदा तैयार करना होगा, जिसमें सभी वर्गों के हितों और संवैधानिक मूल्यों का ध्यान रखा जाए। इस फैसले के बाद शिक्षा व्यवस्था में समानता, सामाजिक न्याय और संतुलन को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

2