Mayawati Budget 2026 Reaction : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में देश का आम बजट पेश किया। बजट सामने आते ही विपक्षी दलों ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भी बजट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया और इशारों में उसकी नीयत और प्राथमिकताओं पर तंज कसा।
बजट सरकार की नीति और नीयत का आईना: मायावती
मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार का बजट हमेशा सत्ताधारी दल की नीति, नीयत, चाल, चरित्र और चेहरे को उजागर करता है। उनके अनुसार, बजट से यह साफ झलकता है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीबों और बहुजनों के व्यापक हित में है या फिर वह केवल पूंजीवादी मानसिकता को बढ़ावा देते हुए बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों के हित साधने में लगी है।
गरीब जनता को कितनी राहत देगा बजट?
बसपा सुप्रीमो ने सवाल उठाया कि सरकार यह स्पष्ट करे कि इस बजट से आम गरीब जनता को वास्तव में कितनी राहत मिलने वाली है। उन्होंने कहा कि सर्वसमाज के हित की बातें केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन पर ईमानदारी से अमल भी होना चाहिए। मायावती के अनुसार, सही नीयत के बिना कोई भी योजना जनता के लिए लाभकारी नहीं हो सकती।
योजनाओं के नाम बड़े, जमीनी असर छोटा?
मायावती ने बजट में घोषित योजनाओं, परियोजनाओं और आश्वासनों पर संदेह जताते हुए कहा कि इनके नाम तो बहुत बड़े और आकर्षक हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके परिणाम कितने प्रभावी होंगे, इस पर सवाल बना रहता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इन योजनाओं का वास्तविक असर दिखे, यह सरकार की जिम्मेदारी है, वरना ये घोषणाएं केवल कागजों तक सिमटकर रह जाएंगी।
आत्मनिर्भर भारत और सरकारी क्षेत्र की भूमिका
बसपा प्रमुख ने कहा कि भारत जैसे देश के लिए यह बेहद जरूरी है कि सरकार की नीति दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता पर केंद्रित हो। उन्होंने सवाल किया कि इस दिशा में सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व दिया गया है और क्या बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के कल्याणकारी संविधान की भावना के अनुरूप कोई ठोस कदम उठाए गए हैं या नहीं।
पिछले बजट के वादों की याद दिलाई
मायावती ने सरकार से यह भी पूछा कि पिछले साल के बजट में किए गए वादे और दावे आखिर कितने पूरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह जानना जरूरी है कि क्या वे सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए या वास्तव में उनका लाभ जनता तक पहुंचा। उनके मुताबिक, हर साल नए वादे करने से पहले पुराने वादों का हिसाब देना जरूरी है।
जीडीपी से ज्यादा जरूरी आम लोगों का जीवन
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि केवल जीडीपी के आंकड़ों से देश की प्रगति का आकलन नहीं किया जा सकता। असली विकास वह है, जो आम लोगों के जीवन में बहुप्रतीक्षित और गुणात्मक बदलाव लेकर आए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बजट की तारीफ करने से पहले यह देखा जाना चाहिए कि इससे व्यापक जनहित और देशहित को कितना लाभ होगा।
सरकार से जवाबदेही की मांग
अपने बयान के अंत में मायावती ने सरकार से अपेक्षा जताई कि वह इन सवालों पर खुलकर रोशनी डाले। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो फिर आम जनता के अच्छे दिनों की जिम्मेदारी कौन निभाएगा। मायावती ने संकेत दिया कि बजट की असली परीक्षा उसके अमल और परिणामों से होगी, न कि सिर्फ घोषणाओं से।










