Mathura Holi: मथुरा में भक्ति और रंगों का संगम, नंद भवन में सजी कान्हा-बलराम की होली

ब्रज की गलियों में होली का उल्लास चरम पर है। बरसाना की लट्ठमार होली के बाद नंदगांव के नंद भवन में भक्तिमय रंगोत्सव देखने को मिला, जहां लड्डू गोपाल और बड़े भाई बलराम ने हर्बल गुलाल से होली खेली।

Mathura Holi

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 3, 2026

Mathura Holi: बरसाना की प्रसिद्ध लट्ठमार होली के बाद अब नंदगांव के नंद भवन में रंग और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां लड्डू गोपाल और उनके बड़े भाई बलराम ने हर्बल गुलाल से होली खेली। जैसे ही कान्हा मंदिर पहुंचे, बलराम ने उनके गालों पर गुलाल लगाया और पूरा वातावरण भक्तिमय और सतरंगी हो गया। श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे और मंदिर परिसर रंगों से सराबोर हो गया।

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लट्ठमार होली की परंपरा

Mathura Holi
मथुरा में भक्ति और रंगों का संगम

बरसाना की लट्ठमार होली के अगले दिन नंदगांव में इसका दूसरा चरण खेला गया। इस बार बरसाना के हुरियारों (पुरुषों) पर नंदगांव की हुरियारिनें (महिलाएं) लट्ठ बरसाती नजर आईं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो राधा-कृष्ण के प्रेम और हंसी-ठिठोली को दर्शाती है।

देवताओं का आगमन और भक्तों का उल्लास

मान्यता है कि ब्रज की होली के दौरान स्वर्ग के देवता भी धरती पर आकर इस उत्सव का आनंद लेते हैं। नंद भवन में जब लड्डू गोपाल और बलराम ने साथ मिलकर होली खेली, तो श्रद्धालुओं को लगा मानो द्वापर युग जीवंत हो उठा हो। गोस्वामी समाज के लोग पारंपरिक पद गाते हुए गुलाल उड़ाते नजर आए। बलराम ने जब कान्हा को तिलक लगाया और गुलाल उड़ाया, तो भक्तों ने जयकारों से वातावरण गुंजा दिया।

भक्तों की उमंग और रंगों की बरसात

देश-विदेश से आए श्रद्धालु ठाकुर जी के साथ होली खेलने को उत्सुक दिखे। भगवान और भक्त के बीच का यह संवाद भावुक और ऊर्जा से भरा हुआ था। कृष्ण और बलराम के सखा भी इस उत्सव में शामिल हुए और श्रद्धालुओं पर पिचकारियों से प्राकृतिक रंग बरसाए। जब भक्तों पर ब्रज का पावन रंग पड़ा, तो वे खुशी से झूम उठे।

नंद भवन का दृश्य

जैसे ही पुजारी ने मंदिर का पर्दा हटाया, हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर धन्य हो गए। मंदिर में चारों ओर गुलाल की बारिश शुरू हो गई। भक्त नाचते-गाते हुए भगवान को होली की शुभकामनाएं देने लगे। मंदिर का हर कोना अबीर और गुलाल की खुशबू से महक उठा और पूरा नंदगांव “नंद के आनंद भयो” के जयकारों से गूंज उठा।

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