ईद पर मसूद अजहर का मैसेज बना चर्चा का विषय, जैश-ए-मोहम्मद में बदलाव के संकेत

नई दिल्ली जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर हमेशा ईद-उल-फितर से पहले अपने समर्थकों और कैडर के लिए मैसेज जारी करता है। एक बार फिर उसने अपने कैडर और समर्थकों के लिए एक ऑडियो क्लिप जारी किया है। हालांकि, भारतीय एजेंसियों के अधिकारी ने इस क्लिप में कुछ अलग नोटिस किया है। एजेंसियों के अनुसार, अपने ईद मैसेज में, अजहर टूटा हुआ लग रहा था और भारत के खिलाफ उसका सामान्य गुस्सा भरा मैसेज भी बहुत कमजोर लग रहा था। जैश-ए-मोहम्मद पर नजर रखने वाली भारतीय एजेंसियों का कहना है कि संगठन के अंदर सब ठीक नहीं है, अजहर बहुत बीमार

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Published On :

मार्च 19, 2026

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नई दिल्ली
जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर हमेशा ईद-उल-फितर से पहले अपने समर्थकों और कैडर के लिए मैसेज जारी करता है। एक बार फिर उसने अपने कैडर और समर्थकों के लिए एक ऑडियो क्लिप जारी किया है। हालांकि, भारतीय एजेंसियों के अधिकारी ने इस क्लिप में कुछ अलग नोटिस किया है। एजेंसियों के अनुसार, अपने ईद मैसेज में, अजहर टूटा हुआ लग रहा था और भारत के खिलाफ उसका सामान्य गुस्सा भरा मैसेज भी बहुत कमजोर लग रहा था।

जैश-ए-मोहम्मद पर नजर रखने वाली भारतीय एजेंसियों का कहना है कि संगठन के अंदर सब ठीक नहीं है, अजहर बहुत बीमार लग रहा है, इसलिए कई लोग नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं। आतंकी संगठन के अंदर, कई लोगों को लगता है कि मौजूदा हालात से कोई मदद नहीं मिल रही है और यह बहुत सारे कामों को रोक रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि अगर कोई ध्यान दे, तो इस बार लश्कर-ए-तैयबा ज्यादा सक्रिय लग रहा है। लश्कर के नेतृत्व को हमास के सदस्यों के साथ घुलते-मिलते देखा गया है। दूसरी ओर, जैश-ए-मोहम्मद साफ तौर पर शांत है और बड़े कार्यक्रमों से गायब है। इससे जैश के नेतृत्व के अंदर खींचतान का पता चलता है।

कई लोगों को एहसास है कि अजहर को बदलना आसान नहीं होगा। ऐसा करने से कैडर का हौसला और भी गिरेगा। हालांकि, दूसरों को लगता है कि अगर सही कमांड नहीं होगी, तो संगठन खत्म होने लगेगा। फिलहाल कोई मजबूत लीडर न होने की वजह से इस संगठन के सदस्यों का बर्ताव भी बदल गया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लॉन्चपैड हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जैश-ए-मुहम्मद के मुकाबले लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव ज्यादा सक्रिय दिखते हैं।

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पहले तो लगा कि जैश-ए-मोहम्मद यह दिखाने के लिए नाटक कर रहा है कि अजहर बीमार और टूटा हुआ है। ऐसा माना जा रहा था कि ऐसा जेईएम चीफ को भारतीय सेना के निशाने से बचाने के लिए किया जा रहा था। हालांकि, अब इंटेलिजेंस एजेंसियों ने यह पुष्टि कर दी है कि अजहर के साथ सब ठीक नहीं है और टॉप शीर्ष नेतृत्व बदलने को लेकर बहस कर रहा है।

एक और अधिकारी ने कहा कि संगठन इस बात को लेकर दुविधा में है कि अजहर के परिवार के किसी सदस्य को चीफ बनाया जाए या किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे ऑपरेशन का अनुभव हो। अधिकारी ने बताया कि कैडर को एकजुट रखने के लिए परिवार का कोई सदस्य पहला ऑप्शन होगा। हालांकि, आतंकी संगठन को एक मजबूत कमांडर की भी जरूरत है।

मिलिट्री मामलों के इंचार्ज अब्दुल जब्बार एक ऑप्शन हो सकता है क्योंकि वह ऑन-ग्राउंड ऑपरेशन देखता है, जिसमें लॉजिस्टिक्स और प्लानिंग भी शामिल है। अजहर के भाई, तल्हा अल सैफ के चुने जाने की उम्मीद कम है, क्योंकि उसका मुख्य काम जैश-ए-मोहम्मद की फंडिंग के लिए डिजिटल वॉलेट मैनेज करने तक ही सीमित रहा है।

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