Mark Carney Davos 2026: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का पारा उस वक्त चढ़ गया, जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जे के प्रयासों और उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर निशाना साधते हुए कार्नी ने कहा कि “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” अब प्रभावी रूप से दम तोड़ चुकी है। हालांकि उन्होंने अपने संबोधन में सीधे तौर पर ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था कि शक्तिशाली देश अब वैश्विक नियमों की परवाह किए बिना अपनी मनमानी कर रहे हैं। कार्नी ने चेतावनी दी कि दुनिया अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर है जहां कूटनीति की जगह ताकत का बोलबाला बढ़ रहा है।
आर्थिक एकीकरण को हथियार बना रही महाशक्तियां: कार्नी की चेतावनी
‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्नी ने महाशक्तियों की विस्तारवादी और दमनकारी नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शक्तिशाली राष्ट्र अपने निजी हितों को साधने के लिए ‘आर्थिक एकीकरण’ (Economic Integration) को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। कार्नी के मुताबिक, मध्यम शक्ति वाले देशों (Middle Power Nations) को अब इन आक्रामक महाशक्तियों के दबाव और धमकी भरी रणनीतियों के खिलाफ एकजुट होना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों और विज्ञापित व्यवस्थाओं का हवाला देना अब बेमानी है, क्योंकि जमीन पर ताकतवर देश केवल अपनी इच्छाएं थोप रहे हैं।
ग्रीनलैंड के साथ खड़ा कनाडा: नए गठबंधनों की जरूरत पर जोर
आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कार्नी ने स्पष्ट किया कि कनाडा, ग्रीनलैंड और डेनमार्क के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला करने का एकमात्र अधिकार वहां के नागरिकों और डेनमार्क को है, किसी बाहरी महाशक्ति को नहीं। कार्नी ने तर्क दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में कनाडा और अन्य समान विचारधारा वाले देशों के पास अब नए सुरक्षा और आर्थिक गठबंधन बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। यह नई व्यवस्था महाशक्तियों द्वारा दी जा रही टैरिफ की धमकियों और जबरदस्ती के व्यापारिक हथकंडों का मुकाबला करने के लिए अनिवार्य है।
नाटो और अनुच्छेद 5 के प्रति अटल प्रतिबद्धता
कनाडा के प्रधानमंत्री ने ट्रंप की रणनीतियों की ओर इशारा करते हुए नाटो (NATO) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कनाडा अपने नाटो भागीदारों के साथ गठबंधन के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों को सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कार्नी ने स्पष्ट किया कि ‘अनुच्छेद 5’ (सामूहिक रक्षा की धारा) के प्रति कनाडा का संकल्प “अटल” है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में दरारें गहरी होती जा रही हैं और अमेरिका अपने सहयोगियों पर ही आर्थिक और राजनीतिक दबाव बना रहा है।
मैक्रों का समर्थन और ट्रंप का सोशल मीडिया पर विवादित नक्शा
कार्नी के भाषण से कुछ घंटे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी ट्रंप की व्यापार नीति और टैरिफ की धमकियों पर तीखा हमला बोला था। मैक्रों ने वैश्विक समुदाय से अपील की कि अमेरिका को ग्रीनलैंड हासिल करने की अनुमति न दी जाए। विवाद तब और गहरा गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक नक्शा पोस्ट किया, जिसमें ग्रीनलैंड और कनाडा दोनों पर अमेरिकी झंडा दिखाया गया था। मैक्रों ने कहा कि बड़े राष्ट्रों की इस तरह की ज्यादती के सामने छोटे और मध्यम देशों को अपनी संप्रभुता बचाने के लिए एकजुट होकर खड़ा होना होगा ताकि किसी भी प्रकार के अनुचित समायोजन से बचा जा सके।










