Manipur Political Crisis: मणिपुर में नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट, बीजेपी ने विधायकों को दिल्ली बुलाया

मणिपुर में जारी जातीय तनाव के बीच बीजेपी आलाकमान ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह समेत सभी विधायकों को दिल्ली बुला लिया है। गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ होने वाली इस गोपनीय बैठक को राज्य में 'मेजर सर्जरी' के तौर पर देखा जा रहा है। क्या मणिपुर में होगा नेतृत्व परिवर्तन?

Manipur Political Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 1, 2026

Manipur Political Crisis : मणिपुर की सियासत में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के केंद्रीय आलाकमान ने मणिपुर के अपने सभी विधायकों और एनडीए के सहयोगी दलों के विधायकों को आपातकालीन विचार-विमर्श के लिए दिल्ली तलब किया है। 31 जनवरी को जारी किए गए एक विशेष निर्देश में सभी विधायकों को 2 फरवरी को दोपहर 2 बजे तक राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने का अल्टीमेटम दिया गया है। अचानक हुए इस बुलाव के बाद राज्य में नई राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है और माना जा रहा है कि केंद्र सरकार मणिपुर के भविष्य को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने वाली है।

राष्ट्रपति शासन का एक साल और भविष्य की चुनौतियां

मणिपुर में पिछले एक साल से राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है। राज्य में 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है और वर्तमान में विधानसभा का कामकाज निलंबित रखा गया है। राष्ट्रपति शासन की एक वर्ष की अवधि 12 फरवरी 2026 को समाप्त होने वाली है। इस समय सीमा के करीब आते ही विधायकों को दिल्ली बुलाया जाना इस ओर इशारा कर रहा है कि केंद्र अब राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से बहाल करने या किसी नए शासन मॉडल पर विचार कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या बीरेन सिंह की वापसी होगी या फिर कोई नया चेहरा राज्य की कमान संभालेगा।

संबित पात्रा और प्रदेश नेतृत्व की सक्रियता

हालांकि इस हाई-प्रोफाइल बैठक के एजेंडे को लेकर बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन पर्दे के पीछे की सक्रियता बहुत कुछ बयां कर रही है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के पूर्वोत्तर समन्वयक संबित पात्रा व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक विधायक के संपर्क में हैं। उन्होंने सभी को समय पर दिल्ली पहुंचने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के जरिए भी विधायकों को एकजुट रहने और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन करने का संदेश भेजा गया है। यह सक्रियता दर्शाती है कि एजेंडा काफी गंभीर और राज्य की स्थिरता से जुड़ा है।

क्या 13 फरवरी से पहले बनेगी नई सरकार?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति शासन की मियाद खत्म होने से पहले सरकार बनाने की यह आखिरी और महत्वपूर्ण कोशिश हो सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले एक हफ्ते के भीतर मणिपुर में नई सरकार के गठन की घोषणा हो सकती है। राज्य में लंबे समय से जारी प्रशासनिक शून्यता और जातीय संघर्षों के बीच एक चुनी हुई सरकार की बहाली जनता के लिए एक बड़ी राहत हो सकती है। ऐसे में दिल्ली की यह बैठक शासन संबंधी अहम फैसलों और भविष्य के रोडमैप को अंतिम रूप देने के लिए बुलाई गई है।

एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे से अब तक का सफर

मणिपुर में राजनीतिक संकट तब गहरा गया था जब पिछले साल 12 फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके तुरंत बाद, 13 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। पिछले 12 महीनों में राज्य ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। अब जब विधायक दिल्ली रवाना हो रहे हैं, तो मणिपुर की जनता और राजनीतिक पदाधिकारियों की नजरें केंद्र के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या केंद्र सरकार शांति बहाली के लिए किसी नए गठबंधन या नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाएगी, यह आने वाले कुछ घंटों में स्पष्ट हो जाएगा।

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