Manipur New CM: मणिपुर की कमान संभालेंगे युमनाम खेमचंद सिंह, जानें कौन हैं नए मुख्यमंत्री और उनका रसूख

Manipur New CM: मणिपुर में एक साल से जारी राष्ट्रपति शासन के बाद बीजेपी ने युमनाम खेमचंद सिंह पर भरोसा जताया है। हिंसा और जातीय तनाव से जूझ रहे राज्य को उबारने की बड़ी चुनौती अब इस 'मार्शल आर्ट्स दिग्गज' के कंधों पर है। आखिर क्यों आरएसएस और केंद्र की पहली पसंद बने खेमचंद?

Manipur New CM

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 3, 2026

Manipur New CM: मणिपुर में लंबे समय से जारी राजनीतिक अनिश्चितता और राष्ट्रपति शासन के दौर के बीच भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा निर्णय लिया है। भाजपा विधायक दल की बैठक में अनुभवी नेता युमनाम खेमचंद सिंह को नया नेता चुन लिया गया है। इस घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि वे मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की बागडोर संभालेंगे। खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीतिक चाल मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य राज्य के सामाजिक समीकरणों को साधना है।

मैतेई समुदाय का प्रतिनिधित्व और सामाजिक आधार

युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के प्रभावशाली मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। मणिपुर की मौजूदा परिस्थितियों में मैतेई समुदाय का राजनीतिक और सामाजिक महत्व काफी अधिक है। 62 वर्षीय खेमचंद सिंह को कमान सौंपकर भाजपा ने राज्य के सबसे बड़े जनसांख्यिकीय समूह को एक मजबूत संदेश दिया है। उनकी स्वीकार्यता न केवल उनके अपने समुदाय में है, बल्कि वे अन्य समुदायों के साथ भी संवाद स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।

सिंगजामेई के विधायक से मुख्यमंत्री तक का सफर

खेमचंद सिंह की राजनीतिक जड़ें काफी गहरी हैं। वे वर्तमान में सिंगजामेई विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीति में आने से पहले वे एक पेशेवर इंजीनियर थे, और उनकी यह तकनीकी पृष्ठभूमि उनके प्रशासनिक कार्यों में भी झलकती है। वे पिछली एन. बीरेन सिंह सरकार में नगर प्रशासन, शहरी विकास और आवास विभाग (MAHUD) जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उनकी कार्यशैली को शांत लेकिन प्रभावी माना जाता है, जो जटिल सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में माहिर हैं।

संघ के करीबी और 2022 से ही सीएम पद के दावेदार

युमनाम खेमचंद सिंह का राजनीतिक कद रातों-रात नहीं बढ़ा है। वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रति समर्पित रहे हैं और संघ के शीर्ष नेतृत्व के काफी करीबी माने जाते हैं। उनके वैचारिक समर्पण और संगठन कौशल के कारण ही 2022 के विधानसभा चुनावों के बाद भी उनका नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहा था। हालांकि, उस समय बीरेन सिंह को प्राथमिकता दी गई थी, लेकिन खेमचंद का रसूख कभी कम नहीं हुआ।

प्रशासनिक अनुभव और मणिपुर की चुनौतियां

एक अनुभवी मंत्री के रूप में खेमचंद सिंह ने मणिपुर के शहरी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब उनके सामने मुख्यमंत्री के रूप में कांटों भरा ताज होगा। पिछले दो वर्षों की हिंसा ने राज्य के बुनियादी ढांचे और सामाजिक सद्भाव को जो चोट पहुँचाई है, उसे ठीक करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। एक पूर्व इंजीनियर होने के नाते उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे राज्य के पुनर्निर्माण और विकास कार्यों को एक नई गति प्रदान करेंगे।

शांति बहाली और विश्वास की बहाली की उम्मीद

मणिपुर की जनता वर्तमान में शांति और स्थिरता की तलाश में है। राष्ट्रपति शासन हटने के बाद एक निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में युमनाम खेमचंद सिंह से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। उनकी नियुक्ति को एक ऐसे नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है जो दिल्ली (केंद्र) और इंफाल (राज्य) के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेगा। भाजपा को भरोसा है कि खेमचंद सिंह का सौम्य स्वभाव और प्रशासनिक पकड़ मणिपुर को हिंसा के दौर से बाहर निकालकर विकास के मार्ग पर ले जाने में सफल होगी।

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