मनातू की नई कहानी: नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब बन रहा शिक्षा का केंद्र

तरहसी (पलामू)  कभी नक्सलवाद, बारूद और दहशत के लिए कुख्यात रहा पलामू जिले का मनातू इलाका आज शिक्षा और उम्मीद की नई कहानी लिख रहा है। यहां मनातू थाना परिसर में शुरू हुई सामुदायिक कोचिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही दिशा और मार्गदर्शन मिले तो कठिन से कठिन हालात भी बदले जा सकते हैं। इस पहल से जुड़े सभी 25 छात्र-छात्राओं ने इंटरमीडिएट परीक्षा में शत-प्रतिशत सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वर्षों तक जिस क्षेत्र में शाम ढलते ही सन्नाटा डर में बदल जाता था, वहीं आज बच्चों के हाथों में

Wrriten By :

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Published On :

मई 7, 2026

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तरहसी (पलामू)

 कभी नक्सलवाद, बारूद और दहशत के लिए कुख्यात रहा पलामू जिले का मनातू इलाका आज शिक्षा और उम्मीद की नई कहानी लिख रहा है।

यहां मनातू थाना परिसर में शुरू हुई सामुदायिक कोचिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही दिशा और मार्गदर्शन मिले तो कठिन से कठिन हालात भी बदले जा सकते हैं। इस पहल से जुड़े सभी 25 छात्र-छात्राओं ने इंटरमीडिएट परीक्षा में शत-प्रतिशत सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

वर्षों तक जिस क्षेत्र में शाम ढलते ही सन्नाटा डर में बदल जाता था, वहीं आज बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में उज्ज्वल भविष्य के सपने दिखाई दे रहे हैं। मनातू थाना परिसर, जो कभी सुरक्षा और अपराध की चर्चाओं तक सीमित था, अब शिक्षा के केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है।

पुलिस नहीं गुरुजी, थाना बना पाठशाला
तत्कालीन थाना प्रभारी निर्मल उरांव ने अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा को मिशन बना लिया। उनके प्रयासों से थाना परिसर में सामुदायिक कोचिंग की शुरुआत की गई, जहां पुलिसकर्मी न केवल सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं, बल्कि छात्रों को पढ़ाई में मार्गदर्शन भी देते हैं।

यह कोचिंग मुख्य रूप से मजदूर और किसान परिवारों के बच्चों के लिए शुरू की गई थी, जो आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते थे। यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिला, जिसका परिणाम आज शत-प्रतिशत सफलता के रूप में सामने आया है।

रेशमी कुमारी ने हासिल किया 70 प्रतिशत अंक
इस कोचिंग की छात्रा रेशमी कुमारी ने साइंस संकाय में 70 प्रतिशत अंक हासिल किए। उन्होंने बताया कि उनके पिता मजदूरी करते हैं और यदि पुलिस की यह पहल नहीं होती तो उनका आगे पढ़ना मुश्किल था।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्मल उरांव बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं कराते थे, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते थे। उनका संदेश था.जिस हाथ में कलम मजबूत हो, वहां अंधेरा ज्यादा देर टिक नहीं सकता।

”मनातू की यह कहानी आज इस बात का प्रमाण बन गई है कि जब खाकी सिर्फ कानून नहीं, बल्कि बदलाव की जिम्मेदारी भी उठाती है, तो सबसे कठिन हालात में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।

नक्सल से शिक्षा की ओर बदलता मनातू
मनातू, जो कभी अफीम की खेती और नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता था, अब शिक्षा और विश्वास की नई पहचान बन रहा है। ग्रामीणों ने पहली बार पुलिस और जनता के बीच इतना आत्मीय और सकारात्मक रिश्ता महसूस किया है।

पलामू एसपी कपिल चौधरी ने सभी सफल छात्रों को बधाई दी और कहा कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगे भी मेहनत करने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।

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