Bengal SIR: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। इस बार विवाद का केंद्र स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाकर सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं, वहीं केंद्र सरकार ने उन पर विदेशी घुसपैठियों को संवैधानिक दर्जा दिलाने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया है। 6 मार्च को होने वाला यह विरोध प्रदर्शन अब दिल्ली बनाम कोलकाता की बड़ी जंग का रूप ले चुका है।
गिरिराज सिंह ने इलेक्शन कमीशन से की बड़ी मांग
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को ममता बनर्जी के प्रस्तावित धरने पर तीखा प्रहार किया। न्यूज़ एजेंसी से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि इस विरोध प्रदर्शन का असली मकसद अवैध इमिग्रेंट्स (Illegal Immigrants) और घुसपैठियों को फायदा पहुंचाना है। गिरिराज सिंह ने भारत निर्वाचन आयोग से विशेष अनुरोध किया कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान उन आधार कार्डों और राशन कार्डों की गंभीरता से जांच की जाए, जो कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से जारी किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी लगभग 10 मिलियन बांग्लादेशी मुसलमानों और रोहिंग्याओं को वोटिंग राइट्स और संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए यह सब कर रही हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है।
SIR लिस्ट में कथित धांधली
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस प्रक्रिया को आम जनता के खिलाफ एक साजिश बताया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 6 मार्च को दोपहर 2 बजे से कोलकाता के मेट्रो चैनल (एस्प्लेनेड) पर मतदाता सूची पुनरीक्षण (Voter List Revision) में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ धरना देंगी। राज्य सरकार का मानना है कि केंद्र के दबाव में अधिकारियों ने इस प्रक्रिया के दौरान भारी अनियमितताएं की हैं, जिसका सीधा असर बंगाल के वैध नागरिकों पर पड़ रहा है। इस धरने में टीएमसी के कई वरिष्ठ नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।
अभिषेक बनर्जी ने उठाए मतदाता सूची पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिषेक बनर्जी ने SIR की फाइनल लिस्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक “पहले से तय टारगेट” को पूरा करने के लिए आम वोटरों के नाम जबरदस्ती हटा दिए गए हैं। सबसे चौंकाने वाला दावा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे 243 लोगों के फोन आए हैं, जिन्हें वोटर लिस्ट में मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि वे पूरी तरह स्वस्थ और जीवित हैं। अभिषेक बनर्जी के अनुसार, गरीबों और आम नागरिकों को इस गलत लिस्ट की वजह से भारी परेशानी उठानी पड़ रही है, और टीएमसी इस ‘प्रशासनिक अन्याय’ के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी।










